एम्स के कार्यवाहक निदेशक डॉ. निखिल टंडन के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी

New Delhi, 5 जून . Supreme Court ने डीएनए जांच रिपोर्ट से जुड़े एक मामले में अपने आदेश का पालन न करने पर एम्स New Delhi के कार्यवाहक निदेशक के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की है. अदालत ने उन्हें 7 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है.

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने इस बात पर नाराजगी जताई कि अदालत के स्पष्ट निर्देश के बावजूद एम्स निदेशक की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया. इसके बजाय एम्स के एक उप सचिव (डिप्टी सेक्रेटरी) ने हलफनामा दाखिल किया.

Supreme Court ने कहा कि 16 अप्रैल को दिए गए आदेश में साफ तौर पर निदेशक से व्यक्तिगत स्पष्टीकरण मांगा गया था. ऐसे में किसी अन्य अधिकारी द्वारा उनकी ओर से जवाब दाखिल करना स्वीकार नहीं किया जा सकता.

सुनवाई के दौरान एम्स की ओर से पेश वकील ने बताया कि फिलहाल संस्थान में स्थायी निदेशक नहीं हैं और वर्तमान अधिकारी केवल कार्यवाहक निदेशक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, हालांकि अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया.

पीठ ने कहा कि चाहे कोई अधिकारी स्थायी पद पर हो या कार्यवाहक के रूप में, उसे अपने पद की जिम्मेदारियां निभानी होंगी. अदालत ने कहा कि वह इस मामले में कार्यवाहक निदेशक को संदेह का लाभ देने के पक्ष में नहीं है और प्रथमदृष्टया यह अवमानना का मामला बनता है.

इसके बाद Supreme Court ने एम्स के कार्यवाहक निदेशक डॉ. निखिल टंडन को मामले में पक्षकार बनाते हुए उनके खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया. अदालत ने निर्देश दिया कि वे 7 जुलाई को दोपहर 12 बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों और अपना जवाब पेश करें.

मामले के मुख्य पक्ष पर सुनवाई करते हुए Supreme Court ने एम्स के फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग की डीएनए रिपोर्ट पर भी गौर किया. रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि संबंधित व्यक्ति का डीएनए प्रोफाइल बिमल किशोर और प्रतिभा कश्यप के डीएनए प्रोफाइल से मेल खाता है, जिससे यह साबित होता है कि बिमल किशोर उसके जैविक पिता हैं.

डीएनए रिपोर्ट के निष्कर्षों को देखते हुए Supreme Court ने कहा कि उससे संबंधित लंबित आवेदनों पर अब अलग से निर्णय देने की आवश्यकता नहीं है और उन्हें निस्तारित कर दिया गया.

हालांकि मामला 7 जुलाई को केवल कार्यवाहक निदेशक की उपस्थिति और अवमानना नोटिस पर उनके जवाब पर विचार के लिए सूचीबद्ध रहेगा.

Supreme Court ने डीएनए रिपोर्ट की प्रतियां सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. साथ ही मूल रिपोर्ट याचिकाकर्ता के वकील को सौंपने और उसे संबंधित हाईकोर्ट के समक्ष पेश करने का भी आदेश दिया है, ताकि वहां कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सके.

एएमटी/वीसी

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