कांग्रेस के बिहार प्रभारी भक्त चरण दास ने राजद पर गठबंधन ”धर्म” का पालन नहीं करने का आरोप लगाया – Daily Kiran
Thursday , 9 December 2021

कांग्रेस के बिहार प्रभारी भक्त चरण दास ने राजद पर गठबंधन ”धर्म” का पालन नहीं करने का आरोप लगाया

पटना (Patna) . बिहार (Bihar) के विधानसभा चुनाव (Assembly Elections)ों में अनुमान से कहीं बेहतर प्रदर्शन करने के करीब एक साल बाद पांच पार्टियों का विपक्षी गठबंधन डगमगाने लगा है. कांग्रेस के बिहार (Bihar) प्रभारी भक्त चरण दास ने राजद पर गठबंधन ”धर्म” का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है.

राजद के राज्य अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने अविश्वास व्यक्त करते हुए प्रतिक्रिया व्यक्त की. उन्होंने कहा, “जब आम चुनाव 2024 में होने हैं, तो लोकसभा (Lok Sabha) चुनाव के बारे में अभी बात करने का क्या तुक है.” दास ने कहा, ‘‘मैं विवाद में नहीं पड़ना चाहता… लेकिन कृपया यह समझें कि एआईसीसी का प्रभारी ऐसी बात नहीं कह सकता जो पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग हो.”
प्रतीत होता है कि महागठबंधन के अंदर तकरार काफी बढ़ गया है. अगले हफ्ते दो विधानसभा क्षेत्रों- तारापुर और कुशेश्वर स्थान में उपचुनाव होने हैं. राजद ने कांग्रेस को विश्वास में लिए बिना दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी. कुछ दिनों की चुप्पी के बाद, कांग्रेस ने पलटवार करते हुए दोनों सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की भी घोषणा कर दी.
यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कांग्रेस द्वारा कन्हैया कुमार को पार्टी में शामिल किए जाने के बाद तकरार बढी है क्योंकि माना जाता है कि उनकी तेजस्वी यादव से ‘प्रतिद्वंद्विता’ है.

कुमार अभी दो सीटों के लिए प्रचार की खातिर राज्य में हैं. कुमार ने इससे पहले बिहार (Bihar) प्रदेश कांग्रेस कमेटी (बीपीसीसी) मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी की उन्हें, हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवाणी जैसे लोगों को मंच देने के लिए सराहना की थी. दो युवा नेताओं के बीच कथित प्रतिद्वंद्विता को लेकर विमर्श की शुरुआत 2019 के लोकसभा (Lok Sabha) चुनावों में हुई जब कन्हैया कुमार ने अपने गृह नगर बेगूसराय (begusarai) क्षेत्र से केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के खिलाफ लोकसभा (Lok Sabha) चुनाव लड़ा. राजद उम्मीदवार तनवीर हसन के भी उम्मीदवार होने से भाजपा के विरोधी मतों में विभाजन हुआ तथा जोरदार प्रचार अभियान के बावजूद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे कुमार चार लाख से अधिक मतों से हार गए.
बिहार (Bihar) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अनिल शर्मा ने कहा कि जब कांग्रेस और राजद के उतार-चढ़ाव भरे संबंधों की बात आती है तो “कन्हैया कोई मुद्दा नहीं हैं” शर्मा ने जोर दिया, ‘‘यह सुनिश्चित करना लालू प्रसाद की रणनीति रही है कि कांग्रेस ऊंची जातियों, दलितों और मुसलमानों के बीच अपना समर्थन फिर से हासिल नहीं कर सके. मजबूत कांग्रेस को राजद के धर्मनिरपेक्ष विकल्प के तौर पर देखा जाएगा. कोई आश्चर्य नहीं है कि वर्षों से उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि उच्च जाति के हमारे उम्मीदवारों को उन सीटों से लड़ने का मौका नहीं मिलता है जहां हमारे जीतने की अच्छी संभावना है. वह उन सीटों को राजद के लिए ले लेते हैं या गठबंधन के किसी अन्य सहयोगी की झोली में डाल देते हैं.

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