
New Delhi, 21 अगस्त . कांग्रेस नेता संतोष सिंह सलूजा ने अमित शाह के ‘वंदे मातरम’ वाले दावे को खारिज किया और भाजपा पर राष्ट्रीय गीत का Politicalरण करने का आरोप लगाया. इसके अलावा कई अन्य नेताओं ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाया.
कांग्रेस नेता संतोष सिंह सलूजा ने से बातचीत में कहा, “सबसे पहली बात तो यह है कि India का हर बच्चा आजादी की लड़ाई के बारे में जानता है कि यह लड़ाई महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और दूसरे महान स्वतंत्रता सेनानियों के नेतृत्व में लड़ी गई थी, जिनमें से अधिकतर कांग्रेस से जुड़े थे. उस समय भाजपा नहीं, आरएसएस था. आरएसएस के लोग अंग्रेजों के एजेंट के तौर पर काम करते थे. आजादी के 50 साल बाद भी नागपुर में आरएसएस के हेडक्वार्टर पर कभी तिरंगा नहीं फहराया गया. उन्होंने तिरंगा नहीं फहराया, वे अपना भगवा झंडा फहराते थे.”
वहीं, वंदे मातरम विवाद पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, ” रवींद्रनाथ टैगोर और सरदार पटेल क्या थे? हम टैगोर, सरदार पटेल और महात्मा गांधी की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं.”
कांग्रेस नेता पवन कुमार बंसल ने कहा, “1936 में कांग्रेस सीडब्ल्यूसी की बैठक में पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना आज़ाद, सुभाष चंद्र बोस और आचार्य नरेंद्र देव मौजूद थे. वे आज के कम्युनिस्टों या हिंदू विचारधारा वाले लोगों के जैसे नहीं थे. उस समय, सभी ने तय किया था कि वे ये दो पद गाएंगे. वंदे मातरम एक युद्ध-घोष है. जब लोग आजादी के लिए आगे बढ़ते थे, तो यह जोश भरने वाला गीत बन गया था. इसलिए इसे दो पदों तक ही सीमित रखा गया था.”
‘वंदे मातरम’ को लेकर उदयवीर सिंह ने कहा कि जिन Governmentों के पास कोई रिपोर्ट-कार्ड नहीं होता, वो विवादित मुद्दों को छेड़ते रहते हैं और उनकी कोशिश होती है कि मूल मुद्दों पर बात न आए. ‘वंदे मातरम’, देशभक्ति और धर्म को भाजपा ने विवाद पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया है और उसी प्रक्रिया में भाजपा लगी हुई है.
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ओपी/एएस