
शिमला, 20 जून . नीट पेपरलीक मामले में एक बार फिर Himachal Pradesh के Chief Minister सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भाजपा पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की Governmentों में पेपर लीक नहीं होते थे. हम तो देख रहे हैं कि भाजपा की Governmentों में आए दिन पेपर लीक होते हैं.
शिमला में मीडिया से बातचीत के दौरान सीएम सुक्खू ने कहा कि केंद्र की भाजपा Government में पेपर लीक की घटनाएं हो रही हैं, जबकि कांग्रेस Government के समय ऐसी घटनाएं नहीं होती थीं. केंद्र Government को इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है कि आखिर पेपर लीक क्यों हो रहे हैं. हमारे लाखों युवा दिन-रात मेहनत कर पढ़ाई करते हैं. हर युवा का सपना होता है कि वह परीक्षा पास कर डॉक्टर बने और देश की सेवा करे. ऐसी ही स्थिति पहले Himachal Pradesh में भी भाजपा Government के समय थी. सबऑर्डिनेट सेलेक्शन बोर्ड में पेपर बेचे जाते थे. Police भर्ती का पेपर भी लीक हुआ था. उस समय तत्कालीन Chief Minister जयराम ठाकुर ने इसकी जांच नहीं करवाई थी. Government में आने के बाद हमने इस भ्रष्ट बोर्ड को भंग किया और इसमें शामिल लोगों को जेल की सलाखों के पीछे भेजने की कार्रवाई की. बच्चों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हम नीट के छात्रों के लिए एचआरटीसी बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा उपलब्ध करवा रहे हैं.
मानसून की तैयारियों को लेकर Chief Minister ने कहा कि पिछले वर्षों के अनुभवों से Government ने काफी सीख ली है और इस बार प्रदेश मानसून सीजन का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने बताया कि आपदा के दौरान रिकॉर्ड समय में वैली ब्रिज स्थापित कर सड़कों को बहाल किया गया था, जिससे राहत और बचाव कार्यों को गति मिली थी.
सुक्खू ने कहा कि इस बार भी प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि Government का लक्ष्य मानसून के दौरान जन-धन की हानि को न्यूनतम रखना तथा किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित राहत, बचाव और पुनर्वास कार्य सुनिश्चित करना है.
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मेडिकल डिवाइस पार्क का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा के नेता जिस मेडिकल डिवाइस पार्क की बात कर रहे हैं, वह प्रदेश हित में नहीं है. इसमें उद्योगों को एक रुपए स्क्वायर मीटर की दर से जमीन उपलब्ध करानी थी और 10 वर्षों तक तीन रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली देनी थी, जबकि सर्दियों के दौरान राज्य को बिजली 7 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदनी पड़ती है. हिमाचल की बहुमूल्य जमीन कौड़ियों के भाव नहीं सौंपी जा सकती. 5000 करोड़ रुपए मूल्य की भूमि को एक करोड़ रुपए में देना प्रदेश के हित में नहीं है. इतना ही नहीं, इसमें उनकी रजिस्ट्रेशन फीस भी माफ थी. Chief Minister के रूप में हम प्रदेश के संसाधनों और जनता के अधिकारों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी समझौता नहीं करेंगे. 75 लाख प्रदेशवासियों के हित सर्वोपरि हैं.
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डीकेएम/पीएम