केरल कांग्रेस में सीएम फेस पर घमासान, केपीसीसी की सख्त चेतावनी

तिरुवनंतपुरम, 25 अप्रैल . केरल कांग्रेस में Chief Minister पद को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है. बढ़ते विवाद और social media पर तेज होती बयानबाजी के बीच केरल प्रदेश कांग्रेस समिति (केपीसीसी) ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को सख्त चेतावनी जारी की है.

केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ ने साफ कहा कि चुनाव के बाद Chief Minister पद को लेकर किसी भी तरह के सार्वजनिक बयान (चाहे वह प्रिंट मीडिया, टीवी या social media पर हो) बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे. उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे बयानों को पार्टी अनुशासनहीनता माना जाएगा और कार्रवाई की जाएगी.

यह निर्देश ऐसे समय में आया है, जब पार्टी के अंदरूनी मतभेद अब खुले तौर पर सामने आ रहे हैं और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के समर्थकों में भी नाराजगी देखी जा रही है. इससे पहले अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) भी नेताओं को इस तरह की चर्चाओं से बचने की सलाह दे चुका है, लेकिन इसके बावजूद कुछ नेता लगातार बयान दे रहे हैं.

चेतावनी के बावजूद पार्टी के भीतर गुटबाजी कम होने के बजाय और बढ़ती नजर आ रही है, खासकर social media प्लेटफॉर्म्स पर.

इसी बीच, एक अहम घटनाक्रम में कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने केपीसीसी डिजिटल मीडिया सेल के प्रमुख पद से इस्तीफा देने की पेशकश की है. उन्होंने यह कदम विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद उठाया है. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि उनका इस्तीफा मौजूदा विवाद से जुड़ा नहीं है. केपीसीसी ने अभी तक उनके इस्तीफे पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है.

वहीं, डिजिटल मीडिया सेल की कोऑर्डिनेटर विमला बिनु ने राज्य Police प्रमुख से शिकायत की है कि उनके नाम से फर्जी स्क्रीनशॉट्स social media पर फैलाए जा रहे हैं. उन्होंने इस मामले में दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है.

दरअसल, यह विवाद तब और बढ़ गया जब कुछ कथित स्क्रीनशॉट्स सामने आए, जिनमें उनके द्वारा केसी वेणुगोपाल के समर्थकों के खिलाफ साइबर हमले की अपील करने का दावा किया गया था.

इस पूरे विवाद में केसी वेणुगोपाल, वीडी. सतीसन और रमेश चेन्निथला के समर्थकों के बीच social media पर तीखी बहस जारी है, जबकि पार्टी के वरिष्ठ नेता सीधे टकराव से बचते नजर आ रहे हैं.

विधानसभा चुनाव के बाद संभावित विधायकों का समर्थन हासिल करना बेहद अहम माना जा रहा है. ऐसे में तीनों गुटों के समर्थक अपने-अपने नेताओं के लिए समर्थन जुटाने में जुटे हैं.

वीकेयू/डीकेपी

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