
New Delhi, 8 जुलाई . मध्य पूर्व एशिया में Wednesday तड़के से हालात फिर तनावपूर्ण हो गए हैं. अमेरिका और ईरान दोनों ने एक दूसरे पर संघर्ष विराम उल्लंघन का आरोप लगाया है. दक्षिण पूर्व एशिया और मध्य एशिया के मामलों को रिपोर्ट करने वाले विदेशी पत्रकार डॉ. वाएल अव्वाद ने से बात करते हुए समझौते के कुछ बिंदुओं पर प्रकाश डाला.
अव्वाद के अनुसार, “यह अमेरिका की ओर से तनाव बढ़ाने वाला एक बड़ा कदम है, जिससे ईरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों, विशेषकर कुवैत और बहरीन में स्थित अड्डों पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है.”
उन्होंने इसमें उल्लेख किया है कि यूएस-ईरान के बीच 14 सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं. इस समझौते के पहले बिंदु में गतिविधियों को रोकने का प्रावधान है, जिसमें लेबनान भी शामिल है.
अव्वाद ने इस पूरे प्रकरण में इजरायल का नाम भी लिया. कहा कि जब अमेरिका के President इजरायल के Prime Minister बेंजामिन नेतन्याहू को दक्षिणी लेबनान पर कब्जा समाप्त करने और लेबनानी ठिकानों पर हमले रोकने के लिए राजी नहीं कर सके, तो उन्होंने होर्मुज में ईरान को उकसाने की रणनीति अपनाई.
डॉ. अव्वाद ने कहा कि समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अनुच्छेद चार में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के उस हिस्से में जहाजों की सुरक्षा और नौवहन की जिम्मेदारी ईरान की होगी. उन्होंने कहा कि ईरान और ओमान अब तक इस क्षेत्र की निगरानी करते रहे हैं, लेकिन अमेरिका नौवहन के मार्ग में बदलाव लाने के लिए ईरान को उकसा रहा है, और यही मौजूदा घटनाक्रम की वजह है.
उन्होंने कहा, “यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका इस समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करने में सक्षम नहीं है. उनके अनुसार, यह एक बड़ा तनावपूर्ण घटनाक्रम है और आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है. यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ जब President डोनाल्ड ट्रंप अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन में शामिल हुए.”
उनके मुताबिक, यह संकेत देता है कि अमेरिका होर्मुज की निगरानी और ईरान का सामना करने के लिए नाटो देशों को भी अपने साथ शामिल करना चाहता है.
डॉ. अव्वाद के अनुसार अमेरिका अपने बूते इस समस्या को नहीं सुलझा सकता है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट पर पूर्ण नियंत्रण ईरान के पास है. इसलिए अमेरिका ने नाटो बलों के साथ मिलकर आगे बढ़ने का फैसला किया है.
उन्होंने कहा कि इस समझौते की 60 दिन की समयसीमा पूरी होने से पहले के अगले दो से तीन महीने पूरे क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. उनके अनुसार, “मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि क्षेत्र एक और व्यापक युद्ध की ओर बढ़ सकता है.”
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केआर/