
गुवाहाटी, 23 अप्रैल . विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर असम के Chief Minister हिमंत बिस्वा सरमा ने Thursday को व्यक्तियों और समाजों को गढ़ने में पुस्तकों के चिरस्थायी महत्व पर जोर दिया. उन्होंने सभी पीढ़ियों में पढ़ने की एक मजबूत संस्कृति विकसित करने के लिए नए सिरे से प्रयास करने का आह्वान किया.
Chief Minister हिमंत बिस्वा सरमा ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “विश्व पुस्तक दिवस पर, मुझे किताबों की उस शांत शक्ति की याद आती है जो हमारे विचारों को आकार देती है, हमारे क्षितिज का विस्तार करती है और हमारे चरित्र को सुदृढ़ बनाती है. पढ़ने की संस्कृति ही एक विचारशील समाज की नींव होती है. आइए, हम इस आदत को पोषित करें और किताबों का यह अनमोल उपहार अगली पीढ़ी तक पहुंचाएं.
विश्व पुस्तक दिवस, जो हर साल 23 अप्रैल को मनाया जाता है, दुनियाभर में पढ़ने, प्रकाशन और कॉपीराइट के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है.
यह दिन विलियम शेक्सपियर और मिगुएल डे सर्वेंट्स जैसे महान साहित्यकारों की विरासत को भी याद करता है, जिनकी रचनाएँ आज भी दुनिया भर के पाठकों को प्रभावित करती हैं. India में, शैक्षणिक संस्थान, पुस्तकालय और साहित्यिक संगठन इस अवसर पर पुस्तक मेलों, पठन सत्रों और जागरूकता अभियानों का आयोजन करते हैं ताकि युवाओं के बीच साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सके.
Chief Minister सरमा का संदेश साक्षरता को बेहतर बनाने और छात्रों में बौद्धिक जिज्ञासा को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय स्तर के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है.
पिछले कुछ वर्षों में, Governmentी और निजी- दोनों ही तरह की पहलों ने पुस्तकालयों को सुदृढ़ बनाने, स्कूलों में पठन कार्यक्रमों को शामिल करने और क्षेत्रीय साहित्य को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया है, ताकि सभी तक पहुंच और समावेशिता सुनिश्चित की जा सके.
वहीं, परिवारों और शिक्षकों की भूमिका पर ज़ोर देते हुए, Chief Minister ने कहा कि बच्चों को कम उम्र से ही पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने से उनके संज्ञानात्मक विकास, रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच के कौशल में काफ़ी सुधार हो सकता है.
उन्होंने यह भी कहा कि आज के डिजिटल भटकावों से भरे दौर में, किताबों में लोगों की रुचि फिर से जगाना एक सामूहिक ज़िम्मेदारी है.
जैसे-जैसे पूरे राज्य और उससे बाहर भी ‘विश्व पुस्तक दिवस’ के समारोह जारी हैं, एक जीवंत पठन संस्कृति बनाने की अपील ज़ोर-शोर से गूंज रही है; यह समाज को सूचित, संवेदनशील और प्रगतिशील समुदायों के निर्माण में किताबों के शाश्वत महत्व की याद दिलाती है.
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एसएके