
Mumbai , 28 मार्च . एक ऐसे समय में जब भारतीय सिनेमा India की विरासत का जश्न मनाने लायक कहानियों को पेश कर रहा है, रामायण का गाथा और भी प्रासंगिक हो जाती है. भगवान राम, लक्ष्मण, माता सीता, हनुमान जी के किरदार के साथ-साथ रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के किरदार भी काफी लोकप्रिय हुए हैं. हालांकि श्रीराम की वानरसेना के सबसे प्रमुख किरदार सुग्रीव पर लोगों का ध्यान अक्सर कम ही जाता है.
रामायण पर केंद्रित कई फिल्मों और धारावाहिक में हम सुग्रीव का किरदार देख चुके हैं, लेकिन रामानंद सागर की रामायण में सुग्रीव का किरदार निभाने वाले श्याम सुंदर कलानी से जिस सहजता से ये किरदार निभाया था, वह अतुलीय है.
मौजूदा समय में रामायण को केंद्र में रखकर कई मेगाबजट की फिल्मों का निर्माण हो रहा है, जिसमें हनुमान जयंती पर फिल्म निर्देशक और पटकथा लेखक नितेश तिवारी द्वारा एक और मल्टीस्टारर फिल्म का ट्रेलर या टीजर या घोषणा की जा सकती है. भगवान राम की सेना की जब बात आती है, तो वानर सेना के बिना रामायण अधूरी है, और वानरराज सुग्रीव के बिना वानरसेना अधूरी है. बात करते हैं श्याम सुंदर कलानी की, जिन्होंने सुग्रीव के किरदार को कैमरे पर जीवंत कर दिया था.
रात का समय था. Gujarat के उमरगांव के घने जंगलों में रामानंद सागर की ‘रामायण’ का सेट लगा हुआ था. शो के निर्माता एक ऐसे चेहरे की तलाश में थे, जो किष्किंधा के वानर राज ‘सुग्रीव’ और अजेय योद्धा ‘बाली’ के किरदार निभा सके. अचानक, उस समय एक विशालकाय कद-काठी का शख्स सेट पर दाखिल हुआ. उसने बिना किसी झिझक के पूरे आत्मविश्वास से कहा, “कृपया मुझे यह भूमिका दें.” वह शख्स कोई और नहीं बल्कि Madhya Pradesh के जबलपुर से आए एक असली पहलवान, श्याम सुंदर कलानी थे.
श्याम सुंदर कलानी का जन्म जबलपुर में हुआ था, और उनका असली प्यार सिनेमा नहीं, बल्कि अखाड़े की मिट्टी थी. एक पेशेवर पहलवान और बॉडीबिल्डर के रूप में, उन्होंने अपने शरीर को फौलाद की तरह गढ़ा था. 80 के दशक में जब वीएफएक्स या कंप्यूटर ग्राफिक्स नहीं होते थे, तब निर्देशकों को पौराणिक राक्षसों या महाबलियों के लिए ऐसे ही ‘रियल लाइफ’ नायकों की जरूरत होती थी.
रामायण में सुग्रीव और बाली, दोनों सगे भाई थे लेकिन एक-दूसरे के जानी दुश्मन. एक ही धारावाहिक में घमंडी बाली और भगवान राम के परम भक्त सुग्रीव का किरदार निभाना आसान नहीं था. लेकिन श्याम सुंदर कलानी की असली चुनौती मनोवैज्ञानिक नहीं, बल्कि तकनीकी थी.
दोनों किरदार वानर थे, इसलिए कलानी को शूटिंग के दौरान बेहद भारी और घुटन भरा प्रोस्थेटिक पहनना पड़ता था. इसके कारण वे अपने डायलॉग नहीं बोल पाते थे. ‘सीता’ का किरदार निभाने वाली दीपिका चिखलिया ने अपने कई इंटरव्यू में बताया कि सेट पर श्याम सुंदर कलानी से केवल होंठ हिलाने को कहा जाता था, क्योंकि उनके संवाद बाद में डबिंग स्टूडियो में कोई और रिकॉर्ड करता था.
‘रामायण’ के सेट पर एक से बढ़कर एक दिलचस्प किस्से बुने गए. सुग्रीव और हनुमान की दोस्ती पर्दे पर तो थी ही, असल जिंदगी में भी श्याम सुंदर कलानी और हनुमान का किरदार निभाने वाले दारा सिंह के बीच गहरी बॉन्डिंग थी. दोनों पहलवान थे. सेट पर कलानी अक्सर दारा सिंह से मजाक करते थे.
रामायण के बाद श्याम सुंदर कलानी को ‘टाइपकास्ट’ कर दिया गया. उनकी विशाल काया आधुनिक किरदारों में फिट नहीं बैठी, इसलिए उन्हें ज्यादा काम नहीं मिला.
मार्च 2020, पूरा India कोरोना के खौफ में अपने घरों में बंद था. दूरदर्शन पर ‘रामायण’ का पुनः प्रसारण शुरू हुआ. एक ही वीकेंड में 17 करोड़ लोग एक्टिव व्यूअर्स बन गए थे.
नियति का खेल देखिए! टीवी स्क्रीन पर ‘किष्किंधा कांड’ चल रहा था. पर्दे पर श्याम सुंदर कलानी के ‘सुग्रीव’ की भव्य एंट्री हो रही थी. पूरा देश उस महाबली को देखकर रोमांचित था और ठीक उसी समय खबर आई कि कैंसर से लड़ते हुए श्याम सुंदर कलानी ने असल दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है.
पर्दे पर सुग्रीव का जन्म हो रहा था और असल जिंदगी में सुग्रीव का किरदार निभाने वाला कलाकार पंचतत्व में विलीन हो रहा था. राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखा था- “वह एक बहुत ही उम्दा इंसान और सच्चे जेंटलमैन थे.”
श्याम शुंदर कलानी ने रामायण के अलावा हिंदी फिल्मों में काम किया था, जिनमें ‘हीर रांझा’, ‘त्रिमूर्ति’, और ‘छैला बाबू’ जैसी फिल्में शामिल थीं. उन्होंने अभिनय के साथ-साथ स्टंट फिल्मों में भी योगदान दिया था.
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वीकेयू/एएस