
New Delhi, 22 जून . केंद्र ने Monday को उन रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि Government विनिवेश कार्यक्रम के तहत कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड का ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) लाने की योजना बना रही है.
वित्त मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, “वर्तमान में कोचीन शिपयार्ड में हिस्सेदारी बिक्री की कोई योजना नहीं है.”
Government द्वारा खारिज की गई रिपोर्ट में दावा किया गया था कि केंद्र 16,000 करोड़ रुपए जुटाने के लिए कोचीन शिपयार्ड में 6 से 8 प्रतिशत हिस्सेदारी ओएफएस के तहत बेचने की योजना बना रही है.
शेयरहोल्डिंग के ताजा पैटर्न के अनुसार, कोचीन शिपयार्ड में Government की हिस्सेदारी 67.91 प्रतिशत है, जबकि लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के पास 87.74 लाख शेयरों के साथ 3.34 प्रतिशत हिस्सेदारी है.
‘ऑफर फॉर सेल’ (ओएफएस) एक ऐसा तरीका है जिसका इस्तेमाल Government अकसर लिस्टेड पब्लिक सेक्टर कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी कम करने और पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाने के लिए करती है.
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब Government ने वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में कई कंपनियों में विनिवेश किया है.
कोल इंडिया, एनएचपीसी, एनएलसी इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में हिस्सेदारी बेचने से केंद्र Government को इस तिमाही में अब तक विनिवेश के जरिए लगभग 14,000 करोड़ रुपये जुटाने में मदद मिली है. बाकी बची रकम का हिसाब होने के बाद कुल रकम के और बढ़ने की उम्मीद है.
अप्रैल-जून तिमाही में Government की विनिवेश से होने वाली कमाई 15,000 करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद है, जिससे नॉन-टैक्स कैपिटल रिसीट्स (गैर-कर पूंजी प्राप्तियां) मजबूत होंगी और वित्त वर्ष 27 के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी.
हिस्सेदारी बेचने और संपत्ति के मुद्रीकरण से होने वाली कमाई केंद्र की राजकोषीय स्थिति को मजबूत करती है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया संकट के कारण फर्टिलाइजर और पेट्रोलियम उत्पादों पर सब्सिडी बढ़ गई है.
Government के वित्त वर्ष 27 एसेट मोनेटाइजेशन प्रोग्राम का लक्ष्य 80,000 करोड़ रुपये की कमाई करना है और इसमें आईडीबीआई बैंक का रणनीतिक विनिवेश और चुनिंदा पब्लिक सेक्टर कंपनियों में आंशिक हिस्सेदारी बेचना भी शामिल है.
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एबीएस