
New Delhi, 22 अप्रैल . केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने घूसखोरी के मामले में गिरफ्तार नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) अधिकारी मुदावत देवुला और एक प्राइवेट कंपनी के अधिकारी भरत माथुर को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया. तीन दिन की सीबीआई कस्टडी पूरा होने के बाद दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया.
डीजीसीए के अधिकारी मुदावत देवुला और दूसरा एक बड़े कॉर्पोरेट ग्रुप के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट भरत माथुर पर आरोप है कि ड्रोन इम्पोर्ट की परमिशन दिलाने के बदले 2.5 लाख रुपए की रिश्वत ली गई. सीबीआई ने इनके घरों और दफ्तरों पर छापे मारे तो 37 लाख रुपए नकद, सोने-चांदी के सिक्के, और कई डिजिटल डिवाइस भी मिले.
मुदावत देवुला डीजीसीए के एयरवर्थनेस डायरेक्टरेट में डिप्टी डायरेक्टर जनरल के पद पर काम करते थे. देवुला का काम यह तय करना होता है कि कोई विमान या ड्रोन उड़ान के लिए सुरक्षित है या नहीं. दूसरे गिरफ्तार शख्स भरत माथुर एक बड़े कॉर्पोरेट ग्रुप में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट है और एक एयरोस्पेस कंपनी से भी जुड़ा हुआ है जो ड्रोन इम्पोर्ट के कारोबार में शामिल है.
सीबीआई के मुताबिक, मुदावत देवुला अपने Governmentी पद का फायदा उठाकर प्राइवेट कंपनियों से पैसे मांगते थे. एक प्राइवेट एयरोस्पेस कंपनी के ड्रोन इम्पोर्ट से जुड़े कई आवेदन डीजीसीए में लंबे समय से अटके पड़े थे. इन आवेदनों पर मंजूरी और परमिशन दिलाने के बदले उन्होंने रिश्वत मांगी थी. भरत माथुर उस प्राइवेट कंपनी की तरफ से बिचौलिए की भूमिका में था. उसने डीजीसीए अधिकारी और प्राइवेट कंपनी के बीच रिश्वत की यह डील करवाई.
केंद्रीय जांच एजेंसी ने 18 अप्रैल को इन दोनों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया. सीबीआई ने मौके पर ही 2.5 लाख रुपए बरामद किए. सीबीआई ने अदालत से दोनों आरोपियों की 5 दिनों की कस्टडी बढ़ाने की मांग की.
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