
Bengaluru, 18 अगस्त . भाजपा ने Tuesday को जेडीएस सदस्यों के साथ मिलकर कर्नाटक विधानसभा के अंदर विरोध प्रदर्शन किया और आदिवासी कल्याण निगम घोटाले से जुड़े आरोपों का सामना कर रहे मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग की.
विपक्षी सदस्यों ने कांग्रेस Government के खिलाफ नारेबाजी की और Lok Sabha में विपक्ष के नेता (एलओपी) राहुल गांधी को भी निशाना बनाया, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हुई.
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सवाल उठाया कि Government लगभग 600 बैंक खातों में धनराशि कैसे हस्तांतरित कर सकती है और Government से जवाब मांगा.
हंगामे के दौरान भाजपा और जेडीएस के सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए पूछा, “दलितों का पैसा कहां गया?” और आरोप लगाया कि यह धनराशि राहुल गांधी के आवास पर गई थी.
अशोक ने नागेंद्र और अन्य के खिलाफ सीबीआई द्वारा दायर आरोपपत्र की एक प्रति प्रदर्शित की, जिससे उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने की विपक्ष की मांग और तेज हो गई.
Bengaluru विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने विरोध प्रदर्शन की निंदा करते हुए कहा कि विपक्ष ने विधायी आचरण की सीमाओं को पार कर लिया है और सदस्यों के अधिकारों का उल्लंघन किया है.
गौड़ा ने कहा, “उनके नारे और बयान रिकॉर्ड पर नहीं आने चाहिए. यह सत्र उनकी गुंडागर्दी का अड्डा बनता जा रहा है.”
गृह, सूचना प्रौद्योगिकी और संचार प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि Government विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा सदन को सुचारू रूप से चलने क्यों नहीं दे रही है.
खड़गे ने पूछा, “हम सवालों के जवाब देने के लिए तैयार हैं. आप सत्र को चलने क्यों नहीं दे रहे हैं?”
अशोक ने अध्यक्ष जीएस पाटिल को संबोधित करते हुए कहा कि विधानसभा का संचालन किसी एक व्यक्ति के लाभ के लिए नहीं किया जाना चाहिए.
इसके बाद अध्यक्ष ने कहा कि नियम 69 के तहत सदन सूखे की स्थिति पर चर्चा करेगा, जैसा कि जेडीएस विधायक एचडी रेवन्ना और अन्य ने सुझाव दिया था. अशोक ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उस समय किसी ने भी ऐसी चर्चा की मांग नहीं की थी.
गौड़ा ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर विपक्ष इस मुद्दे पर चर्चा नहीं करना चाहता तो यह अलग बात है और उन्होंने यह भी कहा कि सूखे की स्थिति कामकाज के लिए प्रासंगिक है. जेडीएस के सदन नेता सीबी सुरेश बाबू ने कहा कि सदन में व्यवस्था नहीं है और उन्होंने अध्यक्ष से आग्रह किया कि किसी भी चर्चा की अनुमति देने से पहले वे व्यवधान को दूर करें.
कार्यवाही के दौरान उस समय और भी तीखी बहस हुई जब नगर प्रशासन मंत्री एचसी बालकृष्ण और अशोक के बीच जुबानी जंग छिड़ गई. अशोक ने बालकृष्ण की आलोचना करते हुए कहा कि वे उनसे कनिष्ठ हैं और उनकी Political साख पर सवाल उठाए.
प्रियांक खड़गे ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि Government को उन लोगों से सबक लेने की जरूरत नहीं है, जिन्होंने कथित तौर पर ‘मंदिर का पैसा चुराया’ था.
शहरी विकास मंत्री यतींद्र सिद्दारमैया भाजपा की आलोचना करने के लिए खड़े हुए. विपक्षी सदस्यों ने तुरंत ‘मूडा’ के नारे लगाकर जवाब दिया, जो यतींद्र सिद्दारमैया के पिता और पूर्व Chief Minister सिद्दारमैया से जुड़े मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण विवाद का संदर्भ था.
बार-बार हुए विरोध प्रदर्शनों और जवाबी प्रदर्शनों ने विधानसभा की कार्यवाही को बाधित कर दिया, क्योंकि विपक्ष नागेंद्र के इस्तीफे की मांग पर अड़ा रहा और Government सदन की निर्धारित कार्यवाही को आगे बढ़ाने का प्रयास करती रही. इस हंगामे के बीच स्पीकर पाटिल ने सदन को स्थगित कर दिया.
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एसएचके/डीकेपी