कुंभ मेले की स्टार मोनालिसा के पति को बड़ी राहत, केरल हाई कोर्ट ने ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी

कोच्चि, 3 जून . केरल हाई कोर्ट ने Wednesday को कुंभ मेले की वायरल मोनालिसा भोसले के पति मोहम्मद फरमान को एक आपराधिक मामले में ट्रांजिट अग्रिम जमानत दे दी. यह मामला Madhya Pradesh Police ने मोनालिसा के पिता की शिकायत के आधार पर दर्ज किया था.

जस्टिस कौसर एडापगाथ ने फरमान को गिरफ्तारी से एक महीने की सुरक्षा दी, जिससे उसे Madhya Pradesh की संबंधित अदालतों में जाने और नियमित अग्रिम जमानत मांगने का समय मिल सके. अदालत ने निर्देश दिया कि फरमान को एक महीने की अवधि पूरी होने तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा.

यह आदेश उस समय आया, जब अदालत अंतर-धार्मिक जोड़े द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका पर विचार कर रही थी. दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अदालत ने Tuesday को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

फरमान पर अपहरण और जालसाजी के आरोपों सहित, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, बाल विवाह निषेध अधिनियम, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है.

Madhya Pradesh Police के केस में आरोप लगाया गया है कि शादी के समय मोनालिसा नाबालिग थी और फरमान ने धोखाधड़ी से शादी का सर्टिफिकेट हासिल किया था.

इस जोड़े की तरफ से पेश होते हुए वकील एम ससिंद्रन ने दलील दी कि ये आरोप झूठे हैं और शूटिंग के दौरान दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो गया था, जिसके बाद उन्होंने केरल के नेय्याट्टिनकारा में शादी करने का फैसला किया. उन्होंने कोर्ट को बताया कि मोनालिसा के पिता ने शुरू में इस रिश्ते को मान लिया था, लेकिन Madhya Pradesh लौटने के बाद उन्होंने अपना रुख बदल लिया.

वकील ने कोर्ट को बताया कि मोनालिसा ने एक हलफनामा दायर किया है, जिसमें उसने शादी के हालात के बारे में बताया है और यह दावा किया है कि शादी के समय वह बालिग थी.

उनकी उम्र के सबूत के तौर पर उनका आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और बैंक अकाउंट की डिटेल्स पेश की गईं.

जोड़े ने कोर्ट को यह भी बताया कि अगर वे Madhya Pradesh लौटते हैं, तो उन्हें जान से मारने की धमकियों और ऑनर किलिंग का डर है. उन्होंने आरोप लगाया कि मोनालिसा का असली जन्म प्रमाण पत्र रद्द करके और कथित तौर पर उनके छोटे भाई का जन्म प्रमाण पत्र दिखाकर, उन्हें नाबालिग साबित करने की कोशिश की जा रही है. मोनालिसा ने अपने जन्म प्रमाण पत्र को रद्द किए जाने को चुनौती देते हुए पहले ही Madhya Pradesh हाई कोर्ट में अर्जी दी है.

इस अर्जी का विरोध करते हुए Madhya Pradesh Government की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील दी कि केरल हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई के लिए सही जगह नहीं है, क्योंकि यह केस Madhya Pradesh में दर्ज किया गया था. उन्होंने ट्रांजिट बेल (अग्रिम ज़मानत) से जुड़े मामलों में कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को लेकर Supreme Court के एक फैसले का हवाला दिया.

Governmentी वकील ने यह भी दलील दी कि चूंकि इस मामले में एससी/एसटी एक्ट के तहत आरोप लगाए गए हैं, इसलिए कानूनी पाबंदियों के चलते अग्रिम जमानत की अर्जी पर सुनवाई नहीं की जा सकती.

इससे पहले, केरल हाई कोर्ट ने इस जोड़े द्वारा पेश किए गए शादी के प्रमाण पत्र की जांच करने के बाद, उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी.

इस ताजा आदेश से फरमान को तो कुछ समय के लिए राहत मिल गई है, लेकिन शादी, उम्र से जुड़े विवाद और Madhya Pradesh Police द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर चल रही लंबी कानूनी लड़ाई का फैसला अब संबंधित अदालतों द्वारा ही किया जाएगा.

पीएसके/एएस

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