
New Delhi, 18 जनवरी . बांग्लादेश में चुनाव को लेकर Political गलियारों में हलचल तेज हो गई है. देश में हिंसा और Political उथल-पुथल के बीच चुनावी तैयारी भी जोरशोर से चल रही है. वहीं, देश की अंतरिम यूनुस Government ने जनजागरूक अभियान शुरू कर दिया है. यूनुस Government आगामी जनमत संग्रह (रेफरेंडम) को लेकर अपना अभियान चला रही है.
मुहम्मद यूनुस ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में बताया कि अंतरिम Government के चीफ एडवाइजर का रेफरेंडम में “हां” वोट के लिए सपोर्ट बांग्लादेश में डेमोक्रेटिक नॉर्म्स के हिसाब से क्यों है?
उन्होंने लिखा, “हाल की कमेंट्री से चिंता जताई गई है कि अंतरिम Government और मुहम्मद यूनुस का बांग्लादेश के इंस्टीट्यूशनल सुधारों पर आने वाले रेफरेंडम में हां वोट के लिए खुला समर्थन, अंतरिम Government की उम्मीदों के हिसाब से नहीं हो सकता है. इन चिंताओं पर सम्मान के साथ विचार किया जाना चाहिए. हालांकि, जब बांग्लादेश के खास Political कॉन्टेक्स्ट, अंतरिम Government के मैंडेट और तुलनात्मक अंतरराष्ट्रीय अभ्यास को ध्यान में रखकर देखा जाता है, तो ऐसी आलोचना बारीकी से जांच करने पर भी टिक नहीं पाती है.”
मुहम्मद यूनुस ने कहा, “बांग्लादेश के मौजूदा बदलाव के समय में, चुप्पी उदासीनता नहीं, बल्कि नेतृत्व की नाकामी होगी. अंतरिम Government का काम सुधार करना है, न कि प्रक्रिया को कम करना. बांग्लादेश की अंतरिम Government सिर्फ रोजाना के Governmentी कामों को चलाने या एक पैसिव चुनावी केयरटेकर के तौर पर काम करने के लिए नहीं बनाई गई थी. अंतरिम Government का काम राज्य को स्थिर करना, लोकतांत्रिक दायित्व बहाल करना, और चुनी हुई Government को अधिकार वापस देने से पहले सुधारों का एक भरोसेमंद फ्रेमवर्क देना रहा है.”
उन्होंने आगे कहा कि जैसा दूसरे देशों में होता है, बांग्लादेश में रेफरेंडम टेक्नोक्रेटिक एक्सरसाइज के तौर पर नहीं बनाए गए हैं. इनका मकसद सीधे पॉपुलर जजमेंट को आसान बनाना है. यह जजमेंट तब और मजबूत होता है जब वोटरों को शासन के लिए जिम्मेदार लोगों की तरफ से साफ तर्क दिए जाते हैं. लोकतांत्रिक सिस्टम में अक्सर नेताओं से उम्मीद की जाती है कि वे उन नीतियों और सुधारों के लिए सार्वजनिक तौर पर बहस करें, जो उनके हिसाब से देश के हित में हैं, और आखिरी फैसला वोटरों पर छोड़ दिया जाता है.
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केके/एबीएम