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Tuesday, 20 October 2026
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ब्रिटेन की मध्यस्थता वाले बयान पर बालेन शाह की सफाई, बोले- खुद सुलझाएंगे भारत-नेपाल सीमा विवाद

ब्रिटेन की मध्यस्थता वाले बयान पर बालेन शाह की सफाई, बोले- खुद सुलझाएंगे भारत-नेपाल सीमा विवाद

काठमांडू, 21 जून . नेपाल के Prime Minister बालेन शाह ने Sunday को भारत-नेपाल सीमा विवाद को सुलझाने में यूनाइटेड किंगडम (यूके) की संभावित भूमिका को लेकर दिए गए अपने पहले बयान पर सफाई दी. उन्होंने कहा कि नेपाल ब्रिटिश मध्यस्थता नहीं चाहता है.

31 मई को संसद के निचले सदन में सांसदों के सवालों का पहली बार जवाब देते हुए Prime Minister शाह ने कहा था कि नेपाल ने सिर्फ India और चीन से ही नहीं, बल्कि ब्रिटिश Government से भी बातचीत की है, क्योंकि ब्रिटिश शासन के समय के कुछ ऐतिहासिक रिकॉर्ड उनके पास मौजूद हैं.

शाह ने तब कहा था, “हमारा मानना है कि इंग्लैंड (यूके) को भी इस मामले में रुचि लेनी चाहिए, क्योंकि यह मुद्दा उस समय से जुड़ा है जब ब्रिटिश India पर शासन करते थे. इसलिए इन सभी मामलों का समाधान बातचीत और कूटनीतिक वार्ताओं के जरिए होना चाहिए.”

इसके अलावा, शाह ने यह भी कहा था कि जिस तरह नेपाल लंबे समय से India पर अतिक्रमण के आरोप लगाता रहा है, उसी तरह नेपाल ने भी भारतीय क्षेत्र पर अतिक्रमण किया है. उनके इस बयान की विपक्षी दलों, विदेश नीति विशेषज्ञों और सीमा मामलों के जानकारों ने आलोचना की थी.

Sunday को दक्षिणी चितवन जिले में शुरू हुए राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के महाधिवेशन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए शाह ने अपने पुराने बयान पर सफाई दी.

उन्होंने कहा, “कालापानी और लिपुलेख के संबंध में हमारे पास सबूत हैं. मेरा मतलब सिर्फ इतना था कि अगर ब्रिटिश शासनकाल के रिकॉर्ड पेश करने की जरूरत पड़ी, तो हम उन्हें प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं. हम ब्रिटेन की मध्यस्थता नहीं चाहते.”

उन्होंने कहा कि नेपाल अपने पड़ोसी देशों के साथ सीमा संबंधी मुद्दों को सीधे बातचीत और तथ्यों के आधार पर सुलझाना चाहता है.

शाह ने कहा, “हम अपने पड़ोसियों के साथ चर्चा करके इन मामलों का समाधान खुद करेंगे. हमारे पास सबूत हैं. मेरे राष्ट्रवाद को लेकर किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए.”

सीमा विवाद कई दशकों से भारत-नेपाल संबंधों में एक प्रमुख विवादित मुद्दा बना हुआ है.

दोनों देश लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्रों पर अपना-अपना दावा करते हैं. फिलहाल यह इलाका India के प्रशासनिक नियंत्रण में है, लेकिन नेपाल लंबे समय से इन क्षेत्रों को अपनी संप्रभु भूमि बताता रहा है. दोनों देशों का कहना है कि लंबित सीमा विवादों का समाधान कूटनीतिक बातचीत और आपसी समझ के जरिए किया जाना चाहिए.

शाह के पहले दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए India के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा था कि India और नेपाल के बीच सीमा विवादों के समाधान में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है. मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद द्विपक्षीय तंत्र ही ऐसे मुद्दों को सुलझाने का सही माध्यम हैं.

जून की शुरुआत में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि दोनों देश सीमा संबंधी मामलों को तय ढांचे के तहत सुलझाने की दिशा में काम कर रहे हैं.

जायसवाल ने कहा, “सीमा संबंधी मुद्दों के समाधान के लिए हमारे पास स्थापित द्विपक्षीय तंत्र मौजूद हैं. India और नेपाल के बीच जो भी द्विपक्षीय मामले हैं, उनमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है.”

शाह की इन टिप्पणियों के कारण जून की शुरुआत में आरएसपी अध्यक्ष रबी लामिछाने की India यात्रा भी चर्चा से कुछ हद तक पीछे छूट गई. लामिछाने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के निमंत्रण पर India आए थे.

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एवाई/डीकेपी

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