
अमरावती, 16 मार्च . आंध्र प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) सदस्य अनंता उदय की पत्नी लक्ष्मी दुर्गा Monday को उनके पूर्व ड्राइवर की हत्या के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) के सामने पेश हुईं.
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के निर्देश पर वह काकीनाडा में जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित हुईं. अनंता उदय उन्हें उप मंडल Police अधिकारी (एसडीपीओ) कार्यालय तक छोड़ने पहुंचे, जहां जांच अधिकारी मनीष पाटिल देवराज ने उनसे पूछताछ की.
हाईकोर्ट ने उन्हें 16 मार्च से 30 मार्च के बीच रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक एसआईटी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था. यह आदेश उस याचिका पर दिया गया था, जिसमें उन्होंने राजमहेंद्रवरम की विशेष एससी/एसटी अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट को रद्द करने की मांग की थी.
पिछले महीने दाखिल पूरक आरोपपत्र में एसआईटी ने कहा था कि 2022 में दलित युवक वीधी सुब्रह्मण्यम की हत्या में लक्ष्मी दुर्गा की भी भूमिका थी. इसके बाद उन्हें मामले में दूसरा आरोपी बनाया गया और एक सप्ताह पहले उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया.
इस मामले में एमएलसी अनंता उदय , जिन्हें अनंता बाबू के नाम से भी जाना जाता है, मुख्य आरोपी हैं. उन पर अपने पूर्व ड्राइवर सुब्रह्मण्यम की हत्या करने और बाद में शव को पीड़ित के घर पहुंचाने का आरोप है.
34 वर्षीय सुब्रह्मण्यम 19 मई 2022 को काकीनाडा में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए थे. उस समय सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के एमएलसी अनंता बाबू रात करीब दो बजे अपने निजी वाहन से शव को पीड़ित के माता-पिता के घर ले गए थे और दावा किया था कि यह सड़क दुर्घटना है.
हालांकि परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए शव लेने से इनकार कर दिया था. इस घटना के बाद परिजनों और दलित संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था.
आरोप है कि बहस के दौरान अनंता बाबू ने सुब्रह्मण्यम को धक्का दिया, जिससे वह गिर पड़े और उनकी मौत हो गई. बाद में मौत को सड़क दुर्घटना दिखाने के लिए शव पर अतिरिक्त चोटें भी पहुंचाई गईं.
घटना के बाद एमएलसी को गिरफ्तार किया गया था और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था.
हालांकि Police 90 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल नहीं कर सकी, जिसके कारण अनंता बाबू को दिसंबर 2022 में डिफॉल्ट जमानत मिल गई थी.
जून 2024 में सत्ता में आने के बाद टीडीपी के नेतृत्व वाली गठबंधन Government ने मामले की दोबारा जांच कराने का फैसला किया. इसके बाद आईपीएस अधिकारी और वर्तमान काकीनाडा डीएसपी मनीष देवराज पाटिल को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया.
जुलाई 2025 में एससी/एसटी विशेष अदालत ने मामले की दोबारा जांच का आदेश दिया था. एमएलसी ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें 90 दिनों के भीतर पूरक आरोपपत्र दाखिल करने को कहा गया था.
पूरक आरोपपत्र में एसआईटी ने कहा कि काकीनाडा के कई स्थानों से जुटाए गए cctv फुटेज में अनंता बाबू और उनकी पत्नी को उस गेस्ट हाउस के पास देखा गया, जहां कथित तौर पर हत्या हुई थी.
जांचकर्ताओं के मुताबिक एमएलसी की गाड़ी एक गेस्ट हाउस के पास अंधेरे इलाके में एक घंटे से अधिक समय तक संदिग्ध रूप से रुकी रही थी.
पिछले महीने Supreme Court ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि इसमें “Police और सत्ता के बीच स्पष्ट गठजोड़” नजर आता है और Police ने अनंता उदय को जमानत दिलाने में मदद करने की कोशिश की थी.
इसके बाद राज्य Government ने जांच में लापरवाही के आरोप में चार Police अधिकारियों को निलंबित कर दिया था.
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डीएससी