
आगरा, 9 अगस्त . उत्तर प्रदेश के आगरा में साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है. ये लोग एक फर्जी कॉल सेंटर चला रहे थे और देश भर के अलग-अलग राज्यों के लोगों को नौकरी दिलाने के बहाने उनसे धोखाधड़ी कर रहे थे.
आगरा के डिप्टी कमिश्नर ऑफ Police आदित्य कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि काउंटर-इंटेलिजेंस टीम और साइबर सर्विलांस टीम ने ताजगंज Police स्टेशन के स्टाफ के साथ मिलकर एक जॉइंट ऑपरेशन चलाया, जिसमें चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है.
उन्होंने बताया कि आरोपियों में से एक बिहार का रहने वाला है और उस पर पहले से ही एक आपराधिक मामला दर्ज है, जबकि दूसरा उत्तर प्रदेश के जौनपुर का रहने वाला है. बाकी दो महिलाएं हैं, जो आगरा की रहने वाली हैं.
सीनियर Police अधिकारी ने कहा कि आरोपियों ने एक ऐसी कंपनी में नौकरी दिलाने के बहाने लोगों के साथ धोखाधड़ी की, जिसका कानूनी तौर पर कोई अस्तित्व ही नहीं है. यह धोखाधड़ी तीन चरणों में की जाती थी. पहले संभावित ‘उम्मीदवार’ को कंपनी में ‘वैकेंसी’ के बारे में कॉल किया जाता था, जिसके बाद पीड़ितों को दिए गए क्यूआर कोड या यूपीआई का इस्तेमाल करके ‘रजिस्ट्रेशन फीस’ देने के लिए कहा जाता था.”
डीसीपी (साइबर क्राइम) आदित्य कुमार ने आगे कहा कि दूसरे चरण में जब पीड़ित भरोसा कर लेते थे तो आरोपी उनसे उस फर्म में ‘सुपरवाइजर’ या ‘गार्ड’ की पोस्ट के लिए लगभग 8,800 रुपए अतिरिक्त देने के लिए कहते थे. पीड़ितों के पैसे ट्रांसफर करने के बाद उनसे जॉइनिंग लेटर के लिए लगभग 10,000 रुपए और देने के लिए कहा जाता था, जो कि फर्जी होता था.
Police अधिकारी के अनुसार, आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि वे आगरा में उस जगह से लगभग दो सालों से धोखाधड़ी कर रहे थे और देश के अलग-अलग हिस्सों में कई अन्य साइबर अपराधों में भी शामिल रहे हैं.
डीसीपी ने कहा, “अब तक आरोपियों ने 15 राज्यों में लगभग 2,500 लोगों के साथ धोखाधड़ी की है.”
उन्होंने बताया कि आरोपियों के पास से 10 मोबाइल फोन, 35 बैंक पासबुक, कई चेक बुक, अलग-अलग बैंकों के 28 एटीएम कार्ड, आठ सिम कार्ड, सात आधार कार्ड, छह पैन कार्ड, दो वोटर आईडी कार्ड, 12 क्यूआर कोड, एक लैपटॉप, एक डेस्कटॉप और अन्य चीजें बरामद की गई हैं.
उन्होंने कहा, “इस बात का पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है कि उन्हें पीड़ितों के कॉन्टैक्ट्स कैसे मिले और धोखाधड़ी से कमाए गए पैसे का इस्तेमाल कैसे किया गया.”
–
डीकेएम/डीकेपी