केरल चुनाव में हार के बाद सीपीआई-एम का आत्ममंथन, उम्मीदवार चयन में गलती मानी

New Delhi, 14 जुलाई . केरल विधानसभा चुनाव में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की करारी हार के बाद पहली बार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई-एम] के राष्ट्रीय नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि पार्टी की चुनावी रणनीति, खासकर उम्मीदवारों के चयन में गलतियां हुई थीं.

New Delhi में तीन दिवसीय केंद्रीय समिति की बैठक के बाद Tuesday को पार्टी के महासचिव एम.ए. बेबी ने कहा कि केरल चुनाव परिणामों की विस्तृत समीक्षा की गई है और पार्टी ने माना है कि उम्मीदवारों के चयन में निर्णय संबंधी चूक हुई. उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के व्यवहार में भी सुधार की आवश्यकता है.

हालांकि उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन स्पष्ट किया कि हर पार्टी सदस्य का आचरण संगठन की छवि और चुनावी प्रदर्शन को प्रभावित करता है.

उन्होंने कहा, “हर कॉमरेड का व्यवहार पार्टी पर असर डालता है.” उनके इस बयान को इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि जवाबदेही केवल संगठनात्मक फैसलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी तय की जाएगी.

एम.ए. बेबी ने बताया कि सितंबर में पार्टी की विस्तारित राज्य समिति की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें चुनावी हार के कारणों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी और सुधारात्मक कदमों पर फैसला लिया जाएगा.

उन्होंने कहा, “सितंबर की बैठक में क्या चर्चा होगी, इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता.”

सीपीआई-एम के लिए यह हार अचानक नहीं आई. इसके संकेत वर्ष 2024 के Lok Sabha चुनाव में ही मिल गए थे, जब केरल की 20 Lok Sabha सीटों में से वाम मोर्चा केवल एक सीट जीत पाया था.

उस समय पार्टी ने व्यापक संगठनात्मक समीक्षा करने के बजाय यह दावा किया था कि वह जल्द ही जनता का विश्वास दोबारा हासिल कर लेगी.

इसके बाद पिछले दिसंबर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भी एलडीएफ को करारी हार का सामना करना पड़ा. तब भी पार्टी नेतृत्व ने इन नतीजों को अस्थायी बताते हुए विधानसभा चुनाव से पहले व्यापक जनसंपर्क और छवि सुधार अभियान चलाया था.

हालांकि यह रणनीति भी असरदार साबित नहीं हुई और हालिया विधानसभा चुनाव में 140 सदस्यीय केरल विधानसभा में एलडीएफ सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया, जो कई दशकों में उसका सबसे खराब प्रदर्शन माना जा रहा है.

इन नतीजों का असर राज्यसभा चुनाव पर भी पड़ा है. केरल से राज्यसभा का एक सदस्य चुनने के लिए कम से कम 36 विधायकों का समर्थन आवश्यक होता है, जबकि एलडीएफ के पास अब 35 विधायक ही हैं.

पार्टी नेतृत्व की यह स्वीकारोक्ति उसके पहले के रुख से अलग मानी जा रही है. अब तक सीपीआई-एम चुनावी हार को अस्थायी और बाहरी कारणों का परिणाम बताती रही थी. अब केंद्रीय समिति ने खुलकर कमियों को स्वीकार करते हुए सुधारात्मक कदम उठाने का संकेत दिया है.

अब सबकी नजर सितंबर में होने वाली राज्य समिति की बैठक पर होगी कि पार्टी केवल आत्ममंथन तक सीमित रहती है या संगठन में ठोस बदलाव भी करती है. सीपीआई-एम के सामने अब चुनौती सिर्फ केरल में खोया जनाधार वापस पाने की नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा की तरह लंबे Political पतन से बचने की भी है.

डीएससी

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