असम और अरुणाचल के बाद त्रिपुरा सरकार ने जिलों में विकास कार्यों की देखरेख के लिए ‘पालक मंत्री’ नियुक्त किए

अगरतला, 18 जुलाई . असम और अरुणाचल प्रदेश के बाद त्रिपुरा में भाजपा Government ने सभी आठ जिलों के लिए ‘पालक मंत्री’ नियुक्त किए हैं. इनका काम विकास कार्यों की देखरेख और निगरानी करना तथा Governmentी कार्यक्रमों को लागू करने में बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है.

Chief Minister सचिवालय से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, आठ जिलों में अलग-अलग विकास कार्यों, कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी और समीक्षा के लिए 11 मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पालक मंत्री नियमित रूप से विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करेंगे, जिला प्रशासन के साथ तालमेल बिठाएंगे, Government की प्रमुख योजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी करेंगे, जनता की शिकायतों का समाधान करेंगे और Governmentी पहलों को समय पर पूरा करना सुनिश्चित करेंगे.

नई व्यवस्था के तहत, गार्जियन मिनिस्टर जिला स्तर पर काम करेंगे. वे जिला प्रशासन, चुने हुए प्रतिनिधियों (जैसे एमएलए, जिला परिषद और पंचायत समिति के सदस्य) और विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ मिलकर विकास कार्यों का मार्गदर्शन और निगरानी करेंगे.

नोटिफिकेशन के मुताबिक, बिजली और कृषि मंत्री रतन लाल नाथ को आदिवासी-बहुल धलाई जिले का पालक मंत्री नियुक्त किया गया है, जबकि वित्त मंत्री प्राणजीत सिंघा रॉय को पश्चिम त्रिपुरा जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

मंत्री संताना चकमा और शुक्ला चरण नोआतिया को उत्तर त्रिपुरा जिले का पालक मंत्री नियुक्त किया गया है, जबकि मंत्री किशोर बर्मन और अनिमेष देबबर्मा को गोमती जिले की जिम्मेदारी दी गई है.

मंत्री सुधांशु दास और वृषकेतु देबबर्मा दक्षिण त्रिपुरा जिले की देखरेख करेंगे. मंत्री सुशांत चौधरी को उनाकोटी जिला, मंत्री टिंकू रॉय को खोवाई जिला और मंत्री विकास देबबर्मा को सिपाहीजाला जिले का पालक मंत्री बनाया गया है.

अधिकारी ने बताया कि इस पहल का मकसद निगरानी को मजबूत करना, विभिन्न Governmentी विभागों के बीच तालमेल बेहतर करना, कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाना और राज्य के सभी जिलों में संतुलित, पारदर्शी और प्रभावी विकास सुनिश्चित करना है.

असम और अरुणाचल प्रदेश ने कुछ साल पहले अपने जिलों के लिए पालक मंत्री नियुक्त करने की ऐसी ही व्यवस्था शुरू की थी, ताकि प्रशासनिक निगरानी बढ़ाई जा सके और Governmentी कार्यक्रमों को बेहतर ढंग से लागू किया जा सके.

Political जानकारों का मानना ​​है कि 2028 के त्रिपुरा विधानसभा चुनावों से पहले, भाजपा Government प्रशासन को लोगों के करीब लाकर जमीनी स्तर पर कामकाज को मजबूत करने की कोशिश कर रही है. इसके तहत Governmentी योजनाओं और विकास परियोजनाओं को लागू करने में आ रही कमियों की पहचान की जा रही है और मंत्रियों की सीधी निगरानी में इनके काम में तेजी लाई जा रही है.

एएसएच/डीकेपी

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