
Lucknow, 16 जून . उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने राज्य के सभी मान्यता प्राप्त मदरसों में शिक्षकों, शिक्षणेतर कर्मचारियों तथा छात्र-छात्राओं की उपस्थिति दर्ज करने के लिए आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली अनिवार्य कर दी है. इस संबंध में परिषद ने सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं.
नई व्यवस्था लागू होने के बाद मदरसों में शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति बायोमेट्रिक मशीन के माध्यम से दर्ज की जाएगी.
इस फैसले को लेकर विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों की सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. Lucknow में इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे आवश्यक और सकारात्मक कदम बताया.
उन्होंने से कहा कि बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू होने से शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होगी. इससे कक्षाएं समय पर संचालित होंगी और शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि मदरसों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों की नियमित मौजूदगी अत्यंत आवश्यक है.
वहीं, जमीयत हिमायतुल इस्लाम के अध्यक्ष मौलाना कारी अबरार जमाल ने भी इस निर्णय का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि यदि Government चाहती है कि मदरसे केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित न रहें, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभाएं, तो यह स्वागतयोग्य पहल है. उन्होंने कहा कि देश में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं और शैक्षणिक संस्थानों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है.
मौलाना अबरार जमाल ने Prime Minister Narendra Modi के उस विचार का भी उल्लेख किया, जिसमें मुस्लिम बच्चों के एक हाथ में लैपटॉप और दूसरे हाथ में कुरान होने की बात कही गई थी. उन्होंने कहा कि इस सोच को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है. उनके अनुसार, मदरसों में देशभक्ति की भावना को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और विद्यार्थियों को राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाया जाना चाहिए.
इस बीच उत्तर प्रदेश Government के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि मदरसों को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया गया है. उन्होंने बताया कि इस संबंध में विभाग की ओर से आवश्यक आदेश जारी कर दिए गए हैं.
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वीकेयू/एएस