
New Delhi, 24 सितंबर . Lok Sabha, राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं में चुनाव जीतने के बाद पिछले चार साल में 111 वर्तमान सांसदों और विधायकों ने Political दल बदले हैं. सबसे बड़ा परिवर्तन नागालैंड में हुआ, जहां Political दल बदलने के सबसे अधिक 32 मामले दर्ज किए गए. इसके बाद पश्चिम बंगाल में 20 मामले दर्ज किए गए. 2022 से 2026 की अवधि के लिए जारी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है.
एडीआर ने नेशनल इलेक्शन वॉच के साथ Lok Sabha, राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए निर्वाचित होने के बाद Political दल बदलने वाले 111 वर्तमान सांसदों और विधायकों के शपथपत्रों का विश्लेषण किया है. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार साल में 26 Lok Sabha सदस्य, 7 राज्यसभा सदस्य और 78 विधानसभा सदस्यों ने Political दल बदले.
राज्यवार दी गई रिपोर्ट के अनुसार, नागालैंड में 32 विधानसभा सदस्यों ने चुनाव में जीत के बाद दूसरी पार्टियों को चुना है. इसके बाद, पश्चिम बंगाल में 20 सांसद दूसरे दल में शामिल हुए हैं. तेलंगाना में 9 विधायक, गोवा में 8, पंजाब में दो, मेघालय में 6, मणिपुर में 5, अरुणाचल प्रदेश में 4, Gujarat में 4, Himachal Pradesh व Rajasthan में दो-दो, जबकि कर्नाटक, Madhya Pradesh, सिक्किम और उत्तर प्रदेश में एक एक विधायक ने दल बदला है.
वहीं, दिल्ली में राज्यसभा के एक सदस्य और Maharashtra में Lok Sabha के 6 सदस्य जीत के बाद दूसरे दलों में शामिल हुए हैं.
Political दल बदलने के सबसे अधिक मामले मूल रूप से एनडीपीपी से निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच दर्ज किए गए, जिनकी संख्या 25 थी. इसके बाद AITC (तृणमूल कांग्रेस) के 20 और कांग्रेस के 19 प्रतिनिधियों ने Political दल बदला. बीआरएस के 9 प्रतिनिधियों ने दल बदला, जबकि आम आदमी पार्टी और एनसीपी के 7-7 प्रतिनिधियों ने Political दल बदला. शिवसेना-यूबीटी के 6 सांसद भी दूसरे दल में शामिल हुए. इसके बाद जदयू के 5 और एनपीपी के 4 प्रतिनिधियों ने Political दल बदला.
एडीआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि दल बदलने वाले 111 सांसदों और विधायकों में से 58 प्रतिशत यानी कुल 64 प्रतिनिधि एनडीपीपी, तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस से थे. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि हाल ही में कुछ राज्य विधानसभाओं में Governmentों के गिरने का कारण उनके विधायकों का दल बदलना था.
एडीआर के आंकड़ों के अनुसार, एनपीएफ (नागा पीपुल्स फ्रंट) में सबसे अधिक 32 प्रतिनिधि शामिल हुए. इसके बाद भाजपा में 29 सांसद और विधायक आए. एनसीपीआई में 20, कांग्रेस में 9, जबकि शिवसेना में 8 प्रतिनिधि शामिल हुए. एनपीपी और पीपीए में क्रमश: 6 और 4 प्रतिनिधि शामिल हुए.
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डीसीएच/