
Mumbai , 2 अक्टूबर . केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि India तेजी से एक प्रमुख समुद्री शक्ति के रूप में उभर रहा है. उन्होंने कहा कि पोर्ट, शिपिंग और वॉटरवेज सेक्टर में लगातार विस्तार हो रहा है और Government का लक्ष्य भारतीय झंडे वाले जहाजों की संख्या बढ़ाकर देश को समुद्री क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाना है.
Mumbai में शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई) की 65वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सोनोवाल ने कहा कि एससीआई ने पिछले 65 वर्षों में देश की समुद्री यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
उन्होंने अलग-अलग भू-Political परिस्थितियों में कंपनी द्वारा उठाए गए साहसी कदमों की सराहना की. Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में पिछले वर्षों में India के समुद्री क्षेत्र को नई दिशा मिली है.
‘सेलिंग इंडियाज ग्रोथ, शेपिंग मैरीटाइम ट्रांसफॉर्मेशन’ थीम पर आयोजित समारोह में सोनोवाल ने कहा कि India के पोर्ट, शिपिंग और वॉटरवेज सेक्टर में व्यापार बढ़ रहा है. इसमें इनलैंड वॉटरवेज, कोस्टल शिपिंग और समुद्री परिवहन सभी शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि Government भारतीय झंडे वाले जहाजों की संख्या बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है. इसके तहत 436 नए भारतीय झंडे वाले जहाज जोड़ने और देश की ग्रॉस टनेज (जीटी) क्षमता को मौजूदा 14 मिलियन जीटी से बढ़ाकर 19 मिलियन जीटी करने का लक्ष्य रखा गया है. साथ ही, जहाज निर्माण क्षमता को बढ़ाकर 4.5 मिलियन जीटी करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है. Government का लक्ष्य है कि 2047 तक India दुनिया के शीर्ष पांच जहाज निर्माण देशों में शामिल हो.
सोनोवाल ने कहा कि वर्तमान में भारतीय झंडे वाले जहाज India के निर्यात कार्गो का केवल पांच प्रतिशत हिस्सा ही परिवहन करते हैं, जबकि 95 प्रतिशत निर्यात कार्गो विदेशी शिपिंग कंपनियों के जरिए जाता है. उन्होंने कहा कि विदेशी शिपिंग कंपनियों पर निर्भरता के कारण हर साल करीब 75 अरब अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा बाहर जाती है.
उन्होंने कहा कि रेड सी, ब्लैक सी और होर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया व्यवधानों ने यह स्पष्ट किया है कि पर्याप्त शिपिंग क्षमता का संबंध देश की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा से भी है. ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ के तहत 2030 तक India को शिपिंग टनेज के मामले में दुनिया के शीर्ष 10 देशों में और 2047 तक शीर्ष पांच देशों में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है.
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एसएके/एमएस