
Mumbai , 6 अक्टूबर . Actor सुहैल नायर इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म ‘उड़ता तीर’ को लेकर चर्चा में हैं. फिल्म की रिलीज से पहले वह इसके प्रमोशन में व्यस्त हैं और इसी दौरान उन्होंने अपने करियर के कुछ खास अनुभव भी साझा किए.
को दिए इंटरव्यू में सुहैल ने दिवंगत Actor ऋषि कपूर के साथ काम करने से लेकर उनके बेटे और Actor रणबीर कपूर के साथ स्क्रीन शेयर करने तक के अपने अनुभव के बारे में बात की.
उन्होंने बताया कि पिता और बेटे दोनों के काम करने का तरीका और सेट पर उनका व्यवहार एक-दूसरे से काफी अलग है.
से बात करते हुए सुहैल ने कहा, ”मैंने ऋषि कपूर के साथ फिल्म ‘शर्माजी नमकीन’ में काम किया था और अब रणबीर कपूर के साथ ‘रामायण: पार्ट 2’ में काम किया है. दोनों कलाकारों के साथ काम करने के अनुभव काफी अलग रहे. दोनों की अपनी अलग शख्सियत है.”
बता दें कि फिल्म ‘शर्माजी नमकीन’ में ऋषि कपूर ने मुख्य किरदार शर्मा जी की भूमिका निभाई थी, लेकिन 2020 में उनका निधन हो गया, जिसके बाद बाकी हिस्से को Actor परेश रावल ने पूरा किया. इस वजह से फिल्म में एक ही किरदार दो अलग-अलग कलाकारों के जरिए नजर आया.
सुहैल ने इस फिल्म के अनुभव को याद करते हुए कहा, ”मैंने एक ही सीन पहले ऋषि कपूर के साथ किया और फिर उसी सीन को परेश रावल के साथ भी शूट किया. मेरा किरदार शर्मा जी के बेटे का था और इसलिए सामने मौजूद Actor के हिसाब से मेरी प्रतिक्रिया भी बदलती थी. एक सीन में मेरा किरदार अपने पिता शर्मा जी को जवाब देता है. ऐसे में सामने जो Actor थे, मैं उन्हीं के अनुसार ही उस सीन में अपना तरीका बदला.”
सुहैल ने कहा, ”दोनों कलाकारों के साथ एक ही सीन करने में मुझे किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं हुई. बल्कि मेरे लिए यह पूरा अनुभव सीखने वाला रहा. बतौर Actor मुझे यह प्रक्रिया बिल्कुल अजीब नहीं लगी और मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि मुझे इस तरह की फिल्म का हिस्सा बनने का मौका मिला.”
जब ने सुहैल से पूछा कि क्या उन्हें ऋषि कपूर और रणबीर कपूर के काम करने के तरीके में कोई समानता नजर आई. इस पर उन्होंने कहा, ”दोनों काफी अलग हैं. उम्र, अनुभव और रिश्तों की वजह से भी मेरा दोनों के साथ काम करने का अनुभव अलग रहा. रणबीर के साथ जिस तरह की शानदार बॉन्डिंग महसूस हुई, वैसी ऋषि कपूर के साथ होना संभव नहीं थी. वह काफी मैच्योर थे. मैं उनसे उनके पुराने काम और करियर के शुरुआती दौर के बारे में पूछता था. उनका अनुभव सुनना मेरे लिए अपने आप में एक खास सीख थी.”
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पीके/एबीएम