
New Delhi, 2 जनवरी . नए साल की शुरुआत से ही राजनीति का पारा चढ़ता दिख रहा है. ऐसे में राजनीति में संभावनाओं की बात करें, तो ‘एकला चलो रे’ की नीति और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के बीच राष्ट्रीय स्तर के गठबंधनों में बड़ी टूट देखने को मिल सकती है. विपक्षी खेमे के भीतर नेतृत्व की खींचतान और विचारधारा के टकराव से कई पुराने साथी अपना रास्ता अलग कर सकते हैं.
हाल ही में इंडिया ब्लॉक की सहयोगी टीएमसी के सांसद अभिषेक बनर्जी के बयान से नए साल की शुरुआत से ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है.
अभिषेक बनर्जी के ‘विपक्षी दलों को जमीन पर चुनाव लड़ना चाहिए’ वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने तंज कसते हुए कहा कि साल बदले, लेकिन ‘इंडी गठबंधन’ के हालात नहीं बदले. गठबंधन के पास न कोई स्पष्ट मिशन है और न ही कोई विजन, सिर्फ भ्रम और आपसी टकराव है.
उन्होंने से कहा था कि ‘इंडी गठबंधन’ के सभी सहयोगी दल चुनाव से पहले एक साथ हो जाते हैं और हार का परिणाम आते ही ‘इंडी गठबंधन’ में खींचतान और विचारधारा के टकराव देखने को मिलते हैं. इसका नमूना हमें दिल्ली और बिहार चुनाव के परिणाम के बाद देखने को मिला था.
साल 2026 में कई राज्यों में होने वाले स्थानीय और क्षेत्रीय चुनाव राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करेंगे. इन चुनावों के नतीजे तय करेंगे कि केंद्र की सत्ता पर पकड़ कितनी मजबूत रहेगी.
2026 वह साल हो सकता है जब सड़क की राजनीति संसद पर भारी पड़े. इसके साथ ही विपक्ष Government की कुछ नीतियों को लेकर सड़क पर उतर सकता है.
इसका नमूना हमे नए साल की शुरुआत के दूसरे दिन ही देखने को मिल गया. Friday को Maharashtra लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों ने भर्ती विज्ञापन में हुई देरी को लेकर एक साल की आयु-सीमा में छूट की मांग तेज कर दी. पुणे में बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतरे और Government से राहत देने की अपील की.
आंदोलनों की इस आग को विपक्षी दल अपनी Political जमीन मजबूत करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. अंतरराष्ट्रीय पटल पर 2026 ‘रणनीतिक पुनर्गठन’ का साल हो सकता है. दुनिया दो ध्रुवों के बीच झूलती नजर आ सकती है, और India इस संतुलन का केंद्र बन सकता है.
वाशिंगटन और बीजिंग के बीच व्यापार युद्ध, तकनीक की होड़ और सुरक्षा चिंताओं को लेकर तनाव गहरा सकते हैं. इसका सीधा असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है, जिससे India के लिए अपनी विनिर्माण क्षमता साबित करने का बड़ा अवसर होगा.
2026 में India ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा. इसमें व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग जैसे दिग्गज नेताओं की भागीदारी न केवल रणनीतिक होगी, बल्कि यह India की तटस्थता और ‘विश्व गुरु’ की छवि की परीक्षा भी होगी. इसके साथ ही, क्वाड शिखर सम्मेलन में डोनाल्ड ट्रंप की भागीदारी पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी होंगी.
भारतीय विदेश नीति के लिए 2026 उपलब्धियों भरा हो सकता है. वर्षों से लंबित पड़े व्यापार समझौते निर्णायक मोड़ पर पहुंचेंगे. गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की यात्रा भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे सकती है. यह India के निर्यात क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर साबित होगा.
फरवरी 2026 में India वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा. यह शिखर सम्मेलन तकनीक की दुनिया में India की धाक जमाएगा. म्यांमार, बांग्लादेश और नेपाल में होने वाले चुनाव India की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे. इस पर India नजर बनाए रखेगा.
दिसंबर 2026 में Prime Minister Narendra Modi मियामी में डोनाल्ड ट्रंप के गोल्फ क्लब में आयोजित होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. यह मुलाकात भारत-अमेरिका के संबंधों के भविष्य की दशा और दिशा तय करेगी.
–
वीकेयू/एबीएम