2000 से अधिक के कमर्शियल यूपीआई भुगतान पर शुल्क के खिलाफ मामला Supreme Court पहुंचा

New Delhi, 16 सितंबर . दो हजार रुपए से अधिक के कमर्शियल यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाए जाने के केंद्र Government के फैसले को चुनौती देते हुए Supreme Court में एक याचिका दायर की गई है. याचिका में Government की संबंधित अधिसूचना और हाल ही में जारी एमडीआर फ्रेमवर्क को रद्द करने की मांग की गई है.

वकील अंजन दत्ता द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि केंद्र Government ने पर्याप्त कानूनी आधार और व्यापक जनहित पर विचार किए बिना यह निर्णय लिया है. याचिकाकर्ता ने 14 दिसंबर को जारी अधिसूचना और 15 सितंबर को लागू किए गए एमडीआर फ्रेमवर्क को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त करने की मांग की है.

याचिका में तर्क दिया गया है कि यूपीआई को देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और लोगों को कम लागत वाली भुगतान सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया था. ऐसे में इस पर अतिरिक्त शुल्क लगाना डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने की नीति के विपरीत है.

इस बीच, 2000 से अधिक के कुछ मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू किए जाने को लेकर Political दलों के बीच भी बहस तेज हो गई है.

BJP MP अनुराग ठाकुर ने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि India की डिजिटल भुगतान व्यवस्था दुनिया भर में मिसाल बन चुकी है. उन्होंने कहा कि छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं और आम लोगों तक डिजिटल भुगतान की पहुंच India की बड़ी उपलब्धि है.

ठाकुर ने कहा, ”India के डिजिटल ट्रांजेक्शन मॉडल की दुनिया भर में चर्चा होती है. बड़े देशों के Prime Minister और President India आकर देखते हैं कि कैसे चाय बेचने वाला, सड़क किनारे का विक्रेता और छोटे व्यापारी आसानी से डिजिटल भुगतान स्वीकार कर रहे हैं.”

उन्होंने कांग्रेस पर इस मुद्दे को लेकर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पूरी रिपोर्ट का गंभीरता से अध्ययन किया जाना चाहिए. अनुराग ठाकुर ने यह भी कहा कि 2000 तक के लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं है और 2000 से अधिक के अधिकांश लेनदेन भी शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे.

वहीं, कांग्रेस समेत विपक्ष ने Government के इस फैसले का विरोध किया है और मांग की है कि इसे वापस लिया जाना चाहिए. विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि इसका असर भी आम नागरिकों पर ही पड़ने वाला है.

एएमटी/डीकेपी

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