
ग्रेटर नोएडा, 24 सितंबर . ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर डबल डेकर स्लीपर बस में हुए भीषण अग्निकांड के बाद बस के संचालन और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. शुरुआती जांच में सामने आया है कि जिस बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत की सूचना है और कई यात्री घायल हुए हैं, उसके खिलाफ पहले से ही यातायात नियमों के उल्लंघन के मामले में बड़ी संख्या में चालान लंबित थे.
जानकारी के मुताबिक, बस के 19 चालान करीब 1.75 लाख रुपए के लंबित थे. इसके बावजूद बस लगातार एक्सप्रेसवे पर यात्रियों को लेकर दौड़ती रही. जांच में बस के परमिट और सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल सामने आए हैं. प्राथमिक जानकारी के अनुसार, बस के खिलाफ बिना वैध परमिट के संचालन का चालान भी किया गया था. बताया जा रहा है कि 19 अगस्त को दिल्ली के मयूर विहार इलाके में बस का 18,500 रुपए का चालान किया गया था. इसमें बस की छत पर अवैध तरीके से सामान ले जाने से संबंधित कार्रवाई भी शामिल थी.
इसके अलावा, इसी अवधि में बिना परमिट बस चलाने को लेकर भी चालान किए जाने की जानकारी सामने आई है. बस के पुराने चालानों की जानकारी से पता चलता है कि यातायात नियमों का उल्लंघन लगातार होता रहा. 7 अप्रैल को 6,900 रुपए का चालान किया गया था. इसमें चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होने और निर्धारित यूनिफॉर्म नहीं पहनने से संबंधित उल्लंघन दर्ज था. इसके बाद 19 अगस्त को बिना परमिट के संचालन के लिए 15 हजार रुपए का चालान काटे जाने की जानकारी है.
इसी तरह 21 जुलाई को 10 हजार रुपए, 15 जून को 4 हजार रुपए, 14 मई को 10,500 रुपए, 6 मई को 500 रुपए, 1 मार्च को 5 हजार रुपए, 21 फरवरी को 500 रुपए और 19 जनवरी को 12 हजार रुपए का चालान किया गया था. इन कार्रवाई के बावजूद बस का संचालन जारी रहना प्रवर्तन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है.
प्रारंभिक जांच के मुताबिक बस में आग एयर कंडीशनिंग सिस्टम में ब्लास्ट के बाद लगी. बताया जा रहा है कि सिस्टम में हुई खराबी के बाद आग ने इंजन के लुब्रिकेटिंग ऑयल को अपनी चपेट में ले लिया. इसके बाद आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया और देखते ही देखते बस के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया. स्लीपर बस होने के कारण कई यात्री ऊपरी बर्थ पर सो रहे थे. अचानक आग लगने से उन्हें संभलने और बाहर निकलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल सका.
हादसे के दौरान यात्रियों में चीख-पुकार मच गई. आग और धुएं के बीच कई यात्रियों ने बस की खिड़कियों के शीशे तोड़े और किसी तरह बाहर निकलकर अपनी जान बचाई. हादसे की सूचना मिलते ही Police और बचाव दल मौके पर पहुंचा. रेस्क्यू टीम ने बस के अंदर फंसे यात्रियों को बाहर निकालने का प्रयास किया.
जानकारी के मुताबिक, 20 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. कई घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है. भीषण हादसे के बाद अब जांच एजेंसियां बस के परमिट, फिटनेस, चालक की योग्यता, पूर्व में किए गए चालानों, सुरक्षा मानकों और आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच कर रही हैं.
खास तौर पर यह सवाल जांच का अहम हिस्सा है कि जब बस के खिलाफ लगातार यातायात नियमों के उल्लंघन में कार्रवाई हो चुकी थी और बड़ी रकम के चालान लंबित थे तो इसके बावजूद बस यात्रियों को लेकर एक्सप्रेसवे पर कैसे संचालित होती रही.
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पीकेटी/डीकेपी