चंडीगढ़: हरियाणा में 16 दिवसीय सूरजकुंड शिल्प महोत्सव 31 जनवरी को होगा शुरू

चंडीगढ़, 28 जनवरी . Haryana में 16 दिवसीय सूरजकुंड शिल्प महोत्सव का शुभारंभ 31 जनवरी से होगा और यह उत्सव 15 फरवरी तक चलेगा.

इस संबंध में Wednesday को Haryana के विरासत एवं पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा ने जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 39वां सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव न केवल देश बल्कि दुनिया के सांस्कृतिक और पर्यटन मानचित्र पर एक सशक्त छाप छोड़ेगा.

मंत्री अरविंद शर्मा ने कहा कि Prime Minister Narendra Modi के आत्मनिर्भर India के विजन को साकार करने के उद्देश्य से आयोजित यह महोत्सव राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों, शिल्पकारों और बुनकरों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सुदृढ़ करेगा. साथ ही, यह बौद्धिक, रचनात्मक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी नई दिशा देगा. महोत्सव का मार्गदर्शक मंत्र ‘लोकल से ग्लोबल–आत्मनिर्भर भारत’ रखा गया है.

उन्होंने बताया कि 31 जनवरी को फरीदाबाद स्थित सूरजकुंड में आयोजित शिल्प सम्मेलन का उद्घाटन उपPresident सीपी राधाकृष्णन करेंगे. इस अवसर पर केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और Haryana के Chief Minister नायब सिंह सैनी विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे. वहीं, 15 फरवरी को समापन समारोह के दौरान Governor प्रोफेसर आशीष कुमार घोष मुख्य अतिथि होंगे.

मीडिया से बातचीत में मंत्री शर्मा ने कहा कि सूरजकुंड शिल्प महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि India की सांस्कृतिक एकता, पारंपरिक शिल्प कौशल और आत्मनिर्भरता की भावना का उत्सव है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह महोत्सव राज्य की विरासत को संरक्षित करने, प्रतिभाशाली कारीगरों और शिल्पकारों के लिए स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने तथा अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

उन्होंने जानकारी दी कि इस वर्ष चौथी बार भागीदार राष्ट्र के रूप में मिस्र अपनी प्राचीन कला और संस्कृति से आगंतुकों को आकर्षित करेगा, जबकि थीम राज्य उत्तर प्रदेश और मेघालय अपने समृद्ध लोक जीवन, सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का प्रदर्शन करेंगे. पिछले वर्ष जहां 44 देशों के 635 प्रतिभागियों ने भाग लिया था, वहीं इस बार 50 से अधिक देशों के करीब 800 प्रतिभागी महोत्सव में शामिल होंगे.

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बुनकरों, कारीगरों और पारंपरिक शिल्पकला की प्रदर्शनी एवं बिक्री के लिए महोत्सव में 1,200 से अधिक स्टॉल लगाए जाएंगे. सांस्कृतिक संध्याओं में पद्मश्री कैलाश खेर, प्रसिद्ध पंजाबी गायक गुरदास मान और पद्मश्री महाबीर गुड्डु जैसे नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे. इसके अलावा, Haryana की लोक कला और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के लिए क्षेत्रीय कलाकार पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ विभिन्न मंचों पर प्रस्तुति देंगे.

पर्यटकों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए मेले के मैदान में लगभग 4.75 करोड़ रुपये की लागत से अवसंरचना विकास कार्य किए गए हैं. इनमें स्थल का सौंदर्यीकरण, रास्तों का चौड़ीकरण, 127 नई झोपड़ियों का निर्माण, पुरानी झोपड़ियों की मरम्मत और मनोरंजन क्षेत्र का विस्तार शामिल है.

इस अवसर पर आयुक्त एवं सचिव (विरासत और पर्यटन) अमित कुमार अग्रवाल ने कहा कि इस महोत्सव में देश के कोने-कोने से कारीगर भाग लेंगे और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता भी देखने को मिलेगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि सूरजकुंड शिल्प महोत्सव का उद्देश्य व्यावसायिक लाभ नहीं, बल्कि कारीगरों और उनकी शिल्पकला को प्रोत्साहित करना है. यह आयोजन आत्मनिर्भरता को मजबूत करने, निर्यात संभावनाओं को बढ़ाने और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे ‘स्थानीय से वैश्विक’ की परिकल्पना साकार होती है.

एएसएच/डीकेपी

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