
New Delhi, 1 जून . कांग्रेस नेता और मीडिया और प्रचार के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक को लेकर लेकर केंद्र Government पर निशाना साधा है. प्रेस कांफ्रेंस में मीडिया से बातचीत करते हुए पवन खेड़ा ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में अपने विनाशकारी रिकॉर्ड के कारण केंद्र Government पूरी तरह बेनकाब हो गई है.
पवन खेड़ा ने कहा कि 12 वर्षों के खुले कुशासन और लगातार किए गए दुष्प्रचार ने India की शिक्षा प्रणाली की नींव को खोखला कर दिया है. सीबीएसई की साख से समझौता किया गया, यूजीसी को बर्बाद कर दिया गया और वैज्ञानिक सोच को कमजोर किया गया. एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों को एक खास रंग में रंगा गया और आरएसएस द्वारा कुलपतियों की नियुक्ति की गई. छात्रों के किसी भी विरोध प्रदर्शन को बुलडोजर से कुचल दिया गया. एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस और अल्पसंख्यक युवाओं के अधिकार छीन लिए गए. बेरोजगारी अपने चरम पर है और शिक्षा बजट में लगातार कटौती की जा रही है, भाजपा के शासन में India के युवाओं की यही कहानी है.
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि India कभी दुनिया को अपनी बौद्धिक प्रतिभा का निर्यात करता था. हमारे आईआईटी और आईआईएम संस्थानों ने वैश्विक स्तर के सीईओ दिए हैं लेकिन आज पूरी दुनिया यह देख रही है कि हमारी Government भ्रष्टाचार और लूट के बिना एक बोर्ड परीक्षा भी ठीक से आयोजित नहीं कर पा रही है. भाजपा ने India के छात्रों का भविष्य अधर में है. संस्थानों को कमजोर कर दिया है और मानकों से समझौता किया है. लाखों युवा वर्षों की जानबूझकर की गई उपेक्षा, दुष्प्रचार और ज़बरन वसूली की कीमत चुका रहे हैं.
एक तरफ जहां Prime Minister Narendra Modi “परीक्षा पे चर्चा” और “एग्जाम वॉरियर्स” जैसे कार्यक्रमों के जरिए अपने निजी प्रचार (पीआर) में व्यस्त रहे, वहीं दूसरी तरफ करोड़ों युवा छात्र और उनके माता-पिता रोज़ाना तकलीफें झेल रहे हैं और इस बीच भाजपा माफिया और लूट के ज़रिए पैसे कमा रही है. व्यापम घोटाला भाजपा का एक ऐसा ‘पायलट प्रोजेक्ट’ था, जिसका मकसद युवाओं के भविष्य को तबाह करना था. अब सीबीएसई से जुड़े ताज़ा घटनाक्रम के बाद, पतन की यह दौड़ पूरी हो चुकी है. जहां एक तरफ Prime Minister Narendra Modi अपनी “मन की बात” में देशवासियों को पानी पीते रहने (हाइड्रेटेड रहने) की सलाह देते हैं, वहीं दूसरी तरफ ‘जेन-जी’ (आज की युवा पीढ़ी) न्याय के लिए प्यासी है!
पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि पेपर लीक की 90 से ज्यादा घटनाओं में 9 करोड़ से अधिक छात्र और उनके माता-पिता पूरी तरह से बेसहारा और अपने हाल पर छोड़ दिए गए हैं. Prime Minister की तरफ से अपनी जिम्म्मेदारी स्वीकार करते हुए एक भी शब्द नहीं कहा गया है. कम से कम Prime Minister इतना तो कर ही सकते हैं कि वे तत्काल प्रभाव से ‘मंत्री प्रधान’ (शिक्षा मंत्री) को उनके पद से हटा दें. अनेक पेपर लीक की घटनाओं ने ‘पेपर लीक माफिया’ के साथ भाजपा के सांठगांठ (नेक्सस) को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है.
पवन खेड़ा ने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार छात्रों की ओर से आवाज उठा रहे हैं और सीबीएसई से जुड़े पूरे मामले का खुलासा कर रहे हैं. यह बेहद शर्मनाक बात है कि Union Minister और भाजपा का पूरा तंत्र 17 साल के छात्रों को निशाना बनाकर, उन्हें “डीप स्टेट एजेंट्स”, “Pakistanी” और “सोरोस के लिए काम करने वाले” कहकर अपनी भ्रष्ट हरकतों को छिपाने की कोशिश कर रहा है.
उन्होंने कहा कि सीबीएसई ने देशभर में अपनी डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली लागू करने से पहले, अंदरूनी तौर पर मिली गंभीर चेतावनियों को नज़रअंदाज़ कर दिया. जनवरी 2026 में किए गए एक ‘ड्राई रन’ (परीक्षण) में 36 बड़ी कमियां सामने आई थीं. इनमें बिना ठीक से देखे या सतही तौर पर जांच करने का जोखिम, मूल्यांकन में ढिलाई, निगरानी की कमी और बड़ी तकनीकी विफलताएं शामिल थीं. शिक्षकों ने चेतावनी दी थी कि इस प्रणाली को पूरी तरह से तैयार होने में कम से कम एक से दो साल और लगेंगे. इसके बावजूद सीबीएसई ने कुछ ही हफ्तों के भीतर इसे जल्दबाज़ी में लागू कर दिया.
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ओपी/वीसी