’10 लाख लोग आएंगे तो व्यापार बढ़ेगा, घटेगा नहीं’, रैली से नुकसान की आशंका पर संदीप दीक्षित

New Delhi, 28 अक्टूबर . कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने दिल्ली में शराब की ऑनलाइन बुकिंग, प्रस्तावित मॉक पार्लियामेंट को अनुमति नहीं मिलने, कांग्रेस की रैली से व्यापारियों को नुकसान होने की आशंकाओं और लाल किले से भाजपा की प्रस्तावित ‘लोकतंत्र बचाओ’ पदयात्रा को लेकर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सोनिया गांधी की किताब को लेकर हो रही प्रतिक्रियाओं पर भी टिप्पणी की. दीक्षित ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कार्यक्रमों को लेकर व्यापारियों की चिंताओं का मुद्दा Political रूप से उठाया जा रहा है. वहीं, उन्होंने मॉक पार्लियामेंट की अनुमति रोके जाने पर भी सवाल खड़े किए.
दिल्ली में शराब की ऑनलाइन बिक्री और बुकिंग के मुद्दे पर संदीप दीक्षित ने पूर्व Chief Minister अरविंद केजरीवाल की Government पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि पहले घर-घर राशन पहुंचाने की बात की जाती थी, लेकिन शराब की दुकानें लोगों के घरों के आसपास खोल दी गईं. पिछली Government ने क्या किया और उसके Political परिणाम क्या रहे, यह अलग विषय है, लेकिन शराब की दुकानों के आसपास होने वाली समस्याओं पर ध्यान देना जरूरी है. शराब की दुकानों के बाहर भीड़ जमा होने, यातायात बाधित होने और कुछ लोगों के वाहनों में बैठकर शराब पीने से हंगामे की स्थिति बन सकती है. ऐसे स्थानों पर लोगों से छेड़छाड़ और बदतमीजी की शिकायतें सामने आती रही हैं.
उन्होंने कहा कि यदि ऑनलाइन बुकिंग का उद्देश्य दुकानों के बाहर भीड़ और अव्यवस्था कम करना है, तो यह प्रयास स्वागत योग्य हो सकता है. हालांकि, उन्होंने इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि बुकिंग के बाद भी लोगों को शराब लेने दुकान तक जाना पड़ेगा, तो समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी. Government को इस व्यवस्था के उद्देश्य और इसके क्रियान्वयन पर स्पष्टता देनी चाहिए.
प्रस्तावित मॉक पार्लियामेंट को अनुमति नहीं दिए जाने पर कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि मॉक पार्लियामेंट का उद्देश्य सांसदों को संसद के बाहर आपस में चर्चा करने और अपनी बात रखने का अवसर देना है. जब निर्वाचित प्रतिनिधि जनता की समस्याओं पर चर्चा करना चाहते हैं, तो उन्हें ऐसी व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए. दीक्षित ने दिल्ली Police के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि मॉक पार्लियामेंट कोई नई अवधारणा नहीं है. विद्यार्थी, कॉलेज और स्थानीय समूह लंबे समय से इस तरह के आयोजन करते रहे हैं. उन्होंने सवाल किया कि जब विपक्ष के नेता इसी प्रक्रिया के जरिए अपनी बात रखना चाहते हैं, तो इसमें आपत्ति क्यों होनी चाहिए.
कांग्रेस की रैली के कारण व्यापारियों को संभावित नुकसान होने की आशंकाओं पर दीक्षित ने कहा कि रामलीला मैदान के आसपास पहले भी बड़ी रैलियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के कारण सामान्य तौर पर दुकानें बंद करने की स्थिति नहीं बनती. कांग्रेस की रैली को लेकर व्यापारियों की चिंताओं को Political नजरिए से देखा जा रहा है. यदि रैली में आठ से दस लाख लोग दिल्ली पहुंचते हैं, तो वे होटल, खाने-पीने की दुकानों, रेहड़ी-पटरी वालों और दूसरे कारोबारियों से सामान खरीद सकते हैं. उन्होंने पानी की बोतल, दवाइयों, कपड़ों और अन्य जरूरी वस्तुओं की खरीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे छोटे व्यापारियों को भी आमदनी हो सकती है. बाहर से आने वाले वाहनों के जरिए पेट्रोल और डीजल की खपत भी बढ़ सकती है, जिससे Government को राजस्व मिल सकता है.
उन्होंने कहा कि व्यापारियों के हितों को लेकर वास्तविक चिंता हो सकती है, लेकिन सभी कारोबारियों को रैली के विरोध में खड़ा मानना उचित नहीं है. दीक्षित ने आरोप लगाया कि विरोध करने वाले कुछ व्यापारी भाजपा या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठनों के निकट हो सकते हैं.
भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ’ पदयात्रा को लेकर दीक्षित ने कहा कि पार्टी को यदि लोकतंत्र बचाने के लिए यात्रा निकालनी है, तो वह ऐसा कर सकती है. हालांकि, उन्होंने इस पहल पर सवाल उठाते हुए लाल किले के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख किया. उन्होंने टिप्पणी की कि भाजपा मुगल इतिहास को लेकर जो रुख रखती है, उसके संदर्भ में लाल किले से यात्रा शुरू करना विरोधाभासी प्रतीत होता है. इस तरह उन्होंने भाजपा की पदयात्रा पर Political तंज कसा.
सोनिया गांधी की किताब को लेकर सामने आ रही प्रतिक्रियाओं पर संदीप दीक्षित ने कहा कि उन्होंने किसी विषय पर क्या लिखा है, इसकी वजह वही बेहतर बता सकती हैं. उन्होंने दावा किया कि सोनिया गांधी की बातों और लेखन पर भाजपा और आरएसएस की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आती हैं. दीक्षित ने वर्ष 2004 और 2009 के चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने उन वर्षों में Government बनाई थी. उन्होंने सोनिया गांधी को विपक्ष की ऐसी नेता बताया जिनके नेतृत्व को आज भी महत्व दिया जाता है. किताब के कुछ अंश सामने आने के बाद जिस तरह की प्रतिक्रियाएं दी जा रही हैं, उनसे Political मतभेद स्पष्ट होते हैं. सोनिया गांधी अपनी बात संतुलित ढंग से रखती हैं और उनकी किताब पर होने वाली बहस को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए.
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पीएसके


