होर्मुज स्‍ट्रेट में पहले जैसी स्थिति बहाल करना जरूरी, यूएनजीए की जनरल डिबेट में बोले सऊदी विदेश मंत्री

संयुक्त राष्ट्र, 27 सितंबर . संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की जनरल डिबेट में सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने कहा कि होर्मुज स्‍ट्रेट में 28 फरवरी से पहले जैसी स्थिति बहाल करना जरूरी है. उन्‍होंने कहा क‍ि वहां जहाजों की आवाजाही पर किसी तरह की फीस या पाबंदी नहीं होनी चाहिए.

उन्होंने खास तौर पर होर्मुज स्‍ट्रेट, बाब अल-मंदेब स्‍ट्रेट, लाल सागर और अदन की खाड़ी का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि किसी भी पक्ष को इन समुद्री रास्तों का इस्तेमाल दबाव बनाने या धमकी देने के हथियार के तौर पर नहीं करना चाहिए.

समाचार एजेंसी स‍िन्हुआ के मुताबिक, फैसल ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पूरे इलाके और दुनिया की सुरक्षा से जुड़ी हुई है. उन्होंने कहा कि खाड़ी में स्थिरता का सीधा संबंध दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सप्लाई चेन से है.

उन्होंने कहा कि सऊदी अरब क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिशों और पहलों का समर्थन करता है. साथ ही उन्होंने पूरे इलाके को सामूहिक विनाश के हथियारों से मुक्त रखने की जरूरत पर जोर दिया.

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य हमले किए थे. इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और मध्य पूर्व में कई ठिकानों को निशाना बनाया.

इस संघर्ष की वजह से होर्मुज स्‍ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई, जिसका सऊदी अरब के तेल को दुनिया के बाजारों तक पहुंचाने पर भी बड़ा असर पड़ा.

इससे पहले Friday को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से कहा था कि ईरान ने कतर के जरिए अमेरिका को एक ठोस योजना भेजी है. इस योजना के तहत अगर जरूरी शर्तें पूरी होती हैं, तो होर्मुज स्‍ट्रेट को सात दिनों के भीतर दोबारा खोला जा सकता है.

अराघची ने कहा कि सात दिनों की यह समय सीमा वॉशिंगटन की ओर से योजना स्वीकार किए जाने के तुरंत बाद शुरू हो जाएगी.उनके मुताबिक, इस योजना के तहत अमेरिका को कुछ कदम उठाने होंगे, जिन्हें पूरा करने में ईरान के हिसाब से चार या पांच दिन लग सकते हैं.

अराघची ने कहा कि इसके बाद छठे दिन स्‍ट्रेट खोल दिया जाएगा और सातवें दिन आपसी सहमति वाले मुद्दों पर अंतिम समझौते के लिए अमेरिका के साथ बातचीत शुरू होगी.

उन्होंने कहा कि अमेरिका से जिन कदमों की मांग की जा रही है, वे नई शर्तें नहीं हैं. उनके मुताबिक, ये शर्तें पहले ही जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन में शामिल की जा चुकी हैं.

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एवाई/पीएम

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