
New Delhi, 5 अक्टूबर . भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत में एक बड़ा इजाफा होने जा रहा है. भारतीय नौसेना के बेड़े में पहले फ्लीट सपोर्ट पोत 6 अक्टूबर को शामिल किया जाएगा. करीब 43,500 टन वजन वाला यह पोत समुद्र में तैनात युद्धपोतों को जरूरी ईंधन और अन्य सामान की आपूर्ति करने में अहम भूमिका निभाएगा. इसका सीधा फायदा नौसेना की समुद्र में लंबे समय तक अभियान चलाने की क्षमता पर पड़ेगा. यानी युद्धपोतों को बार-बार तट पर लौटने की जरूरत कम होगी.
भारतीय युद्धपोत हिंद महासागर क्षेत्र में लंबे समय तक और ज्यादा दूर तक अभियान जारी रख सकेंगे. इससे भारतीय नौसेना की समुद्री पहुंच और अभियान क्षमता को मजबूती मिलेगी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह Tuesday को विशाखापत्तनम में इस पोत के जलावतरण के दौरान मौजूद रहेंगे. हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में पहले फ्लीट सपोर्ट पोत को जलावतरण होगा. इसी कार्यक्रम में वह पांचवें फ्लीट सपोर्ट पोत की आधारशिला भी रखेंगे. इसके साथ ही शिपयार्ड की उन्नत स्लिपवे-4 तथा 300 टन क्षमता वाली विशाल क्रेन का उद्घाटन भी करेंगे.
रक्षा मंत्रालय का मानना यह कार्यक्रम India की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता के बढ़ते सामर्थ्य को दिखाता है. शिपयार्ड में सुविधाओं के विस्तार से अब बड़े और जटिल समुद्री पोतों के निर्माण की क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी. यहां सबसे बड़ा आकर्षण फ्लीट सपोर्ट पोत-1 का जलावतरण होगा. यह भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे पांच फ्लीट सपोर्ट पोतों में पहला है.
खास बात यह है कि स्टील काटने (निर्माण की शुरुआत) होने के महज 18 महीने बाद यह पोत बंगाल की खाड़ी के पानी में उतरेगा. राजनाथ सिंह इसी कार्यक्रम में फ्लीट सपोर्ट पोत-5 की आधारशिला भी रखेंगे. यह कदम पूरे कार्यक्रम के अगले चरण में पहुंचने का संकेत है. पांचवें पोत की आधारशिला के साथ इन बड़े पोतों का निर्माण एक के बाद एक करने की दिशा में कार्यक्रम आगे बढ़ेगा. फ्लीट सपोर्ट पोतों का महत्व इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि ये समुद्र में मौजूद युद्धपोतों के लिए एक तरह से चलता-फिरता रसद केंद्र बनकर काम करते हैं.
इनके जरिए नौसेना के अग्रिम मोर्चे पर तैनात जहाजों की अभियान क्षमता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलेगी. वहीं, हिंदुस्तान शिपयार्ड की स्लिपवे-4 को भी इस कार्यक्रम के दौरान नई क्षमता के साथ शुरू किया जाएगा. इसकी लंबाई बढ़ाई गई है और भार उठाने की क्षमता को बेहतर किया गया है. इसके साथ 300 टन क्षमता वाली गॉलियथ क्रेन भी काम करेगी. इन सुविधाओं के मजबूत होने के बाद शिपयार्ड में 45,000 डेडवेट टन तक के पोत बनाए और समुद्र में उतारे जा सकेंगे.
इससे शिपयार्ड बड़े और जटिल समुद्री प्लेटफॉर्म बनाने के लिए और अधिक सक्षम होगा. इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के Chief Minister एन. चंद्रबाबू नायडू, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन और रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे.
एक ही कार्यक्रम में पहले फ्लीट सपोर्ट पोत का जलावतरण व फिर पांचवें पोत की आधारशिला और शिपयार्ड की नई निर्माण सुविधाओं का उद्घाटन किया जाएगा. इसे भारतीय नौसेना की समुद्री रसद क्षमता और स्वदेशी जहाज निर्माण अभियान के लिए अहम पड़ाव माना जा रहा है.
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जीसीबी/डीकेपी