
Mumbai , 12 अक्टूबर . केंद्र Government द्वारा जंतर-मंतर को विरोध-स्थल के रूप में डी-नोटिफाई करने और जेन-जी प्रदर्शन पर जारी सख्ती के बीच एआईएमआईएम प्रवक्ता वारिस पठान ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने इंडिया गठबंधन के मार्च से दूरी बनाते हुए कहा कि उनकी पार्टी इसका हिस्सा नहीं है, लेकिन दिल्ली में पत्रकारों की हिरासत, मेट्रो-ट्रांसपोर्ट बंदी और वकीलों पर कथित बर्बरता अलोकतांत्रिक है.
एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा, “उनका मार्च है, हम इसका हिस्सा नहीं हैं. कल हमारी पार्टी के प्रेसिडेंट असदुद्दीन ओवैसी ने खुलकर, खुले मंच से आजमगढ़ में, यूपी में अपनी बात रखी है. उन्होंने सब बता दिया कि हमारी पार्टी का क्या स्टैंड है. हमारी पार्टी का स्टैंड यह है कि दिल्ली के अंदर दो दिन से जो हो रहा है, जो अवैध हिरासत में लिया जा रहा है, ट्रांसपोर्ट बंद किया जा रहा है, मेट्रो बंद की जा रही है, पत्रकारों को उठाकर ले जाया जा रहा है, वकीलों के साथ बर्बरता की जा रही है, हम इन तमाम चीजों की निंदा करते हैं.”
उन्होंने कहा, “हम सभी इसकी निंदा करते हैं. विरोध करने का अधिकार सबको संविधान देता है. संविधान का अनुच्छेद 19 शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार देता है, सब कर सकते हैं. वे लोग विरोध कर रहे हैं. हमारी पार्टी का स्टैंड बिल्कुल स्पष्ट था कि जब चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का कानून पास हो रहा था, उस वक्त सदन के पटल पर खड़े होकर अगर किसी ने पूरी तरह से इसका विरोध किया था, तो वह हमारी पार्टी के अध्यक्ष ओवैसी थे. उन्होंने बताया था कि अगर यह कानून आ गया तो कितना नुकसान होगा, इसके पूरे खामियों को गिनाया था और आज वही हो रहा है.”
वारिस पठान ने आगे कहा कि हर सवाल का जवाब उन्होंने दिया है. उन्होंने बताया कि देखिए हम बात कर रहे हैं, आइए साथ मिलकर लड़ते हैं, हम हिस्सेदारी की बात कर रहे हैं, इज्जत की बात कर रहे हैं, Political सशक्तिकरण की बात कर रहे हैं, लोगों को न्याय दिलाने की बात कर रहे हैं, तब हम आपको बुला रहे हैं. इसमें आपकी मान-मर्यादा और इज्जत का भी सवाल है.
केंद्र Government ने कहा है कि जंतर-मंतर अब विरोध प्रदर्शन की जगह नहीं रहेगी, उसे डी-नोटिफाई किया गया है और केंद्र Government की तरफ से तीन नए विकल्प दिए गए हैं. इसे लेकर एआईएमआईएम प्रवक्ता ने कहा, “फिलहाल केंद्र Government पूरी तरह से बौखलाई हुई है, पूरी तरह से घबरा चुकी है. लोगों ने जिस तरह से वहां आकर प्रदर्शन किया, जेन-जी सबका जोश देखा, तो अब उन्हें लग रहा है कि इसे और आगे बढ़ा देना चाहिए, यहां से हटाकर और दूर कर देना चाहिए.”
उन्होंने आगे कहा, “लेकिन संविधान ने जो अधिकार दिया है, शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार, वह कोई नहीं छीन सकता. आप कहीं भी करिए, जिसे विरोध करना है, वह तो करेगा ही. अगर कोई Government की नीतियों के खिलाफ है तो वह बराबर विरोध करेगा, यह उसका अधिकार है, मौलिक अधिकार है.”
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केके/एमएस