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Wednesday, 21 October 2026
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स्पेस में हथियारों की तैनाती पर प्रतिबंध की मांग, भारत ने दिया सख्त वैश्विक समझौते पर जोर

स्पेस में हथियारों की तैनाती पर प्रतिबंध की मांग, India ने दिया सख्त वैश्विक समझौते पर जोर

संयुक्त राष्ट्र, 21 अक्टूबर . अंतरिक्ष के बढ़ते सैन्यीकरण और इसके हथियारकरण से जुड़े जोखिमों के बीच India ने अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती पर रोक लगाने के लिए एक व्यापक और कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि अपनाने की वकालत की है.

राज्यसभा सदस्य सुधा मूर्ति ने Tuesday को कहा, “India एक कानूनी रूप से बाध्यकारी दस्तावेज को तरजीह देता है, जो सार्वभौमिक रूप से स्वीकार्य हो, सत्यापन योग्य हो और बहुपक्षीय बातचीत से तय किया गया हो.”

उन्होंने कहा, “India मानता है कि बाहरी अंतरिक्ष की सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरों, गलतफहमी और गलत आकलन के जोखिम और अंतरिक्ष में बल प्रयोग क्या माना जाएगा, इन सभी पर एक साथ विचार किया जाना चाहिए.”

उन्होंने कहा, “कुछ खतरों पर चुनिंदा ध्यान देना और दूसरों को नजरअंदाज करना उल्टा असर डालेगा.” सुधा मूर्ति ने कहा कि संधि पर बातचीत के लिए मंच जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र का निरस्त्रीकरण सम्मेलन होना चाहिए. कार्रवाई की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि दोहरे उपयोग वाली अंतरिक्ष तकनीकें और संपत्तियां अब एक वास्तविकता हैं.

अमेरिका ने अंतरिक्ष में हथियार रखने की बात स्वीकार की है. अमेरिकी वायु सेना सचिव ट्रॉय मिंक ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि उनके देश ने कक्षा में अंतरिक्ष नियंत्रण हथियार तैनात किए हैं, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि वे क्या थे.

सुधा मूर्ति ने कहा, “बाहरी अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ को रोकने के तरीकों पर और किस तरीके को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, इस पर मतभेद बना हुआ है.”

उन्होंने कहा, “हम आगे की चर्चा के लिए बाहरी अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती रोकने पर मसौदा संधि को एक आधार के रूप में देखते हैं.”

पहले जिसे बाहरी अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती रोकने की संधि के रूप में जाना जाता था, इसका मसौदा चीन और रूस ने 2008 में पेश किया था. इसका मुख्य रूप से अमेरिका ने विरोध किया था, जिसने कहा था कि यह अस्पष्ट है, यह पृथ्वी-आधारित एंटी-सैटेलाइट सिस्टम से खतरों को संबोधित नहीं करता है, और इसकी सत्यापन प्रणाली अपर्याप्त है.

अमेरिका और जापान ने 2024 में सुरक्षा परिषद में अंतरिक्ष में परमाणु हथियारों को रोकने पर एक प्रस्ताव पेश किया था, लेकिन रूस ने इसे वीटो कर दिया था.

सुधा मूर्ति ने कहा, “India सार्वभौमिक और गैर-भेदभावपूर्ण, गैर-बाध्यकारी मानदंडों और पारदर्शिता और विश्वास-निर्माण उपायों के लिए खुला है, लेकिन ये कानूनी रूप से बाध्यकारी दस्तावेज के पूरक हो सकते हैं, उसका विकल्प नहीं.”

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वीकेयू/एएस

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