
Mumbai , 24 सितंबर . आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के मामले में जोगेंद्र कवाड़े ने आईआईटी बॉम्बे के निदेशक से मुलाकात की. मुलाकात के बाद से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह साहिल के माता-पिता से मिलने और उन्हें सांत्वना देने के लिए पहुंचे थे, लेकिन उन्हें जानकारी मिली कि साहिल के माता-पिता को वहीं रोक दिया गया है. कवाड़े ने इसे अन्यायपूर्ण बताया.
कवाड़े ने बताया कि आईआईटी निदेशक के साथ करीब आधे घंटे तक उनकी बातचीत हुई. इस दौरान निदेशक ने उन्हें बताया कि संस्थान जांच में पूरा सहयोग कर रहा है और मामले की जांच चल रही है. उन्होंने निदेशक से उस प्रोफेसर को लेकर सवाल किया, जिसे संस्थान की ओर से निलंबित किया गया है. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रोफेसर की भूमिका को लेकर कार्रवाई की गई है तो उसे Police को क्यों नहीं सौंपा गया.
उन्होंने कहा कि निदेशक ने बताया कि मामला अब क्राइम ब्रांच के पास है और उसकी ओर से जांच शुरू कर दी गई है. कवाड़े ने कहा कि उनकी मांग है कि साहिल की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए. उन्होंने पूरे मामले की तह तक जाने के लिए सीबीआई जांच की भी मांग की. कवाड़े ने बताया कि संस्थान की ओर से कहा गया है कि अगर सीबीआई जांच होती है तो प्रबंधन जांच में सहयोग करेगा.
कवाड़े ने आईआईटी बॉम्बे के प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि साहिल के साथ घटना होने के बाद तत्काल कार्रवाई नहीं की गई और अब छात्र की मौत के बाद कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने कहा कि साहिल की मौत के बाद उसके इंसाफ की मांग करने के बजाय कुछ प्रोफेसरों ने कथित तौर पर निलंबित प्रोफेसर के समर्थन में मोर्चा निकाला. लेकिन साहिल को श्रद्धांजलि देने के लिए भी संस्थान में उसी तरह की बैठक नहीं की गई. इस पूरे मामले में जातीय मानसिकता का पहलू भी सामने आता है और उच्च शिक्षण संस्थानों में ऐसी मानसिकता को बदलने की जरूरत है.
कवाड़े ने कहा कि आईआईटी बॉम्बे ने अपनी ओर से जांच की है और संबंधित प्रोफेसर को निलंबित किया गया है, लेकिन आगे की कार्रवाई अब क्राइम ब्रांच को करनी है. Police को पहले आरोपी की गिरफ्तारी करनी चाहिए और जांच बाद में भी जारी रह सकती है. मामले में जो भी व्यक्ति शामिल पाया जाता है, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. अगर जांच में संस्थान के किसी जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए.
जोगेंद्र कवाड़े ने आगे कहा कि उनकी मुख्य मांग साहिल को न्याय दिलाना और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है. उच्च शिक्षण संस्थानों में प्राध्यापकों की कथित जातीय मानसिकता को बदलने के लिए Government को ठोस कदम उठाने चाहिए. शिक्षा संस्थानों में ऐसी परिस्थितियां नहीं बननी चाहिए, जिनके कारण किसी छात्र को इस तरह का कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़े. साथ ही, उन्होंने मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग दोहराई.
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पीएसके