वर्ल्ड टूरिज्म डे 2026: पर्यटन बना रोजगार और विकास का मजबूत आधार, धार्मिक यात्राएं बनीं सबसे बड़ी वजह

New Delhi, 26 सितंबर . हर वर्ष 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है. किसी भी कंट्री कीइकोनॉमी और कल्चरल आइडेंटिटी टूरिज्म होती है. टूरिज्म से लोगों जगहों, संस्कृतियों, परंपराओं और विरासत को जानने का अवसर मिलता है. इसके साथ लोगों को रोजगार और स्थानीय इकोनॉमी को बढ़ावा मिलता है. टूरिज्म के इन्हीं महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर वर्ष 27 सितंबर को वर्ल्ड टूरिज्म डे मनाया जाता है.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, टूरिज्म से एंप्लॉयमेंट, स्थानीय इकॉनमी और सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत के संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है. वर्ल्ड टूरिज्म डे की शुरुआत वर्ष 1980 में हुई थी. इससे पहले वर्ष 1979 के सितंबर महीने में स्पेन में आयोजित यूएम टूरिज्म जनरल एसेंबली के तीसरे सत्र में इसको प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया था. पहली बार 27 सितंबर 1980 को विश्व पर्यावरण दिवस (वर्ल्ड टूरिज्म डे) मनाया गया था. टूरिज्म कई देशों और स्थानीय लोगों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण माध्यम है.

होटल, परिवहन, बाजार, खान-पान और कई अन्य क्षेत्र भी टूरिज्म की गतिविधियों से जुड़ जाते हैं. सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी टूरिज्म का महत्वपूर्ण पहलू है. इस वर्ष इसकी आधिकारिक थीम “पर्यटन को नया रूप देने के लिए डिजिटल एजेंडा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता” है.

पर्यटन के लिए India में कई जगहें हैं, जहां लोग आसानी से पहुंच जाते हैं और वहां की संस्कृति, खान-पान और स्थानीय माहौल का आनंद लेते हैं. पीआईबी के अनुसार, जुलाई 2025 से जून 2026 के दौरान 48 प्रतिशत लोगों ने सबसे अधिक यात्राएं ‘तीर्थयात्रा और धार्मिक’ उद्देश्य से कीं. उत्तर प्रदेश सबसे अधिक देखी जाने वाली जगहों के तौर पर उभरा है.

उत्तर प्रदेश में 15.7 प्रतिशत पर्यटकों ने यात्राएं कीं, जिसके राज्य और अन्य राज्यों से आने वाले पर्यटक शामिल हैं. 13.7 प्रतिशत लोगों ने तमिलनाडु में यात्राएं कीं और 8 प्रतिशत लोगों ने Rajasthan की यात्राएं कीं. सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि पिछले 365 दिनों में स्वास्थ्य और चिकित्सा संबंधी यात्राओं पर सबसे अधिक खर्च हुआ. ग्रामीण परिवारों का औसत व्यय 29,454 रुपए और शहरी परिवारों का 41,649 रुपए रहा.

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एसडी/वीसी

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