
New Delhi, 12 सितंबर . केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे अवैध सिम बॉक्स ऑपरेशन के मामले में बिहार और Odisha में 10 ठिकानों पर छापेमारी कर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपी वैशाली जिले के महुआ क्षेत्र में एयरटेल का एरिया डिस्ट्रीब्यूटर है. उस पर बड़ी संख्या में सिम कार्ड कथित तौर पर फर्जी तरीके से जारी कर उन्हें अवैध सिम बॉक्स संचालन के लिए उपलब्ध कराने का आरोप है.
सीबीआई ने बताया कि वैशाली (बिहार), जगतसिंहपुर (Odisha), समेत 10 स्थानों पर की गई तलाशी के दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिम कार्ड सहित विभिन्न डिजिटल उपकरणों से आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है.
जांच एजेंसी बिहार के सुपौल जिले में पिछले साल सामने आए एक अवैध सिम बॉक्स ऑपरेशन के मामले की जांच कर रही है. बाद में बिहार Government ने इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया था. जिस घर में सिम बॉक्स का संचालन किया जा रहा था, वहां से 1,300 से अधिक सिम कार्ड बरामद किए गए थे.
सीबीआई ने बताया कि जांच के दौरान जुटाए गए आंकड़ों से संकेत मिला है कि यह सिम बॉक्स ऑपरेशन देशभर में साइबर अपराध के कम से कम 73 मामलों से जुड़ा हुआ था. इनमें ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए ठगी के मामले भी शामिल हैं.
जांच में 1,300 से अधिक सिम कार्ड से जुड़े आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण किया गया. इसके आधार पर कुछ संदिग्ध प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) की पहचान की गई. जांच में सामने आया कि इनमें से बड़ी संख्या में सिम कार्ड बिहार और Odisha से जारी किए गए थे.
सीबीआई के अनुसार, इनमें 700 से अधिक सिम कार्ड बिहार के वैशाली जिले में एक एयरटेल एरिया डिस्ट्रीब्यूटर द्वारा जारी किए गए थे. आरोप है कि डिस्ट्रीब्यूटर ने एक दर्जन से अधिक सिम कार्ड प्वाइंट ऑफ सेल के क्रेडेंशियल का दुरुपयोग कर इन सिम कार्ड को जारी किया.
जांच के दौरान कई ऐसे ग्राहक भी सामने आए, जिन्होंने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि उनके नाम पर सिम कार्ड जारी किए गए हैं. आरोप है कि कुछ मामलों में लोगों को वास्तविक जरूरत के लिए सिम कार्ड प्रदाता के पास जाने पर कई बार ई-केवाईसी कराने के लिए धोखे से तैयार किया गया और उनके नाम पर अतिरिक्त सिम जारी कर दिए गए. कुछ मामलों में पहले किसी अन्य उद्देश्य से एकत्र किए गए बायोमेट्रिक डेटा का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया.
सीबीआई ने बताया कि बिहार Government से मामला स्थानांतरित होने के बाद एजेंसी धोखाधड़ी, जालसाजी और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत जबरन वसूली, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत पहचान की चोरी और कंप्यूटर संबंधी अपराधों तथा दूरसंचार अधिनियम, 2022 के अन्य प्रावधानों के तहत मामलों की जांच कर रही है.
जांच एजेंसी ने कहा कि वह दूरसंचार ढांचे का दुरुपयोग कर साइबर ठगी को सक्षम बनाने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है.
सीबीआई ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए दोहराया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है. एजेंसी ने लोगों से कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नाम पर पैसे की मांग करने वाले फोन कॉल से सावधान रहने और फर्जी निवेश योजनाओं के जाल में नहीं फंसने की अपील की है.
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डीएससी