
Bengaluru, 20 सितंबर . केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने Sunday को कहा कि India का रेशम उत्पादन 2014 में 26,000 मीट्रिक टन से बढ़कर आज 42,000 मीट्रिक टन हो गया है. उन्होंने कहा कि Government का लक्ष्य 2028-29 तक देश को दुनिया का सबसे बड़ा रेशम उत्पादक बनाना है.
सेंट्रल सिल्क बोर्ड के 77वें स्थापना दिवस कार्यक्रम और रेशम उत्पादों व तकनीकों की प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए सिंह ने कहा कि केंद्र Government रेशम उत्पादन क्षेत्र का विस्तार करने और रेशम किसानों की आर्थिक प्रगति को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. केंद्र ने 2030-31 तक उत्पादन को बढ़ाकर 60,000 मीट्रिक टन करने का लक्ष्य रखा है.
उन्होंने बताया कि शहतूत के पत्तों की पैदावार बढ़ाकर और कोकून पालन के चक्रों में वृद्धि करके, Government का लक्ष्य किसानों की सालाना आय को 10-12 लाख रुपए तक पहुंचाना है. सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि वैज्ञानिकों के इनोवेशन, हाइब्रिड किस्में और आधुनिक मशीनरी सीधे किसानों तक पहुंचनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि चीन में उत्पादन घटने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय रेशम की मांग बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि रेशम उत्पादन से लेकर बुनाई तक की वैल्यू चेन को मजबूत करना, India के कपड़ा बाजार को 300 अरब डॉलर तक बढ़ाना और बुनकरों व श्रमिकों के लिए न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना मुख्य प्राथमिकताएं हैं.
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि रेशम उत्पादन में कर्नाटक देश में सबसे आगे है.
उन्होंने बताया कि Government इस सेक्टर को मजबूत करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल ग्रोथ पर ध्यान दे रही है. Government ग्लोबल एक्सपोर्ट स्टैंडर्ड के हिसाब से सिल्क का उत्पादन करने, इम्पोर्ट कम करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए आधुनिक टेक्नोलॉजी और हाई-डेंसिटी प्रोडक्शन तरीकों को प्राथमिकता दे रही है.
उन्होंने कहा कि सब्सिडी और क्वालिटी सुधारने वाली स्कीमों की मदद से ज्यादा से ज्यादा एंटरप्रेन्योर एमएसएमई फ्रेमवर्क के तहत रजिस्टर करा रहे हैं.
मिनिस्ट्री ऑफ टेक्सटाइल्स की जॉइंट सेक्रेटरी (सिल्क) पद्मिनी सिंगला ने कहा कि ज्यादा पैदावार देने वाले रेशम के कीड़ों की हाइब्रिड किस्में और मशीनरी लाई जा रही हैं. साथ ही, क्वालिटी की जांच और प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने के लिए एआई, जीआईएस और मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.
इस प्रोग्राम में सिल्क बोर्ड ने कई संगठनों के साथ एमओयू साइन किए, 28 वैज्ञानिकों को अपॉइंटमेंट लेटर बांटे, बेहतरीन काम करने वाले कर्मचारियों और स्टेकहोल्डर्स को अवॉर्ड दिए और पब्लिकेशन व मैगजीन जारी किए.
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एमएस/