शाहदरा थाने में वकीलों से मारपीट पर भड़के सौरभ भारद्वाज, बोले-पुलिस की बर्बरता और सरकार के खिलाफ एकजुट हों अधिवक्ता

New Delhi, 27 अक्टूबर . शाहदरा Police स्टेशन में वकीलों के साथ मारपीट का मामला सामने आने के बाद अधिवक्ताओं की हड़ताल और Police की कार्रवाई को लेकर विवाद गहरा गया है. आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने इस मामले में अधिवक्ताओं से एकजुट होने की अपील करते हुए Police की कार्यशैली और Government के रवैये पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि Police की बर्बरता और Government के अहंकार के खिलाफ सभी अधिवक्ताओं को एक साथ खड़ा होना चाहिए.
सौरभ भारद्वाज के मुताबिक, शाहदरा थाने में वकीलों के साथ कथित मारपीट की घटना के विरोध में अधिवक्ता हड़ताल पर हैं. वकीलों का आरोप है कि Police ने आरोपियों को गिरफ्तार नहीं करने के बदले रिश्वत ली थी. भारद्वाज ने आरोप लगाया कि वकीलों की शिकायत पर थाना प्रभारी (एसएचओ) के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बजाय Police ने अधिवक्ताओं के खिलाफ ही First Information Report दर्ज कर दी. उन्होंने इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कानून के रखवाले ही न्याय की मांग कर रहे हों और उनके खिलाफ ही कार्रवाई होने लगे, तो यह गंभीर चिंता का विषय है.
सौरभ भारद्वाज ने अपने बयान में पत्रकार से जुड़े एक पुराने मामले का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि जब एक पत्रकार ने एसीपी विवेक भगत के खिलाफ कथित छेड़छाड़ के आरोप में First Information Report दर्ज करने की मांग की थी, तब बाद में Police ने पत्रकार के खिलाफ ही जातिसूचक टिप्पणी करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर दिया था. भारद्वाज ने दोनों मामलों के बीच समानता बताते हुए Police की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए.
उनका आरोप है कि शिकायत करने वालों की बात सुनने और आरोपों की निष्पक्ष जांच करने के बजाय शिकायतकर्ताओं के खिलाफ ही कार्रवाई की जा रही है. हालांकि, दोनों मामलों की परिस्थितियों और आरोपों की कानूनी स्थिति का निर्धारण जांच तथा संबंधित साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है. आप नेता ने बार काउंसिलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पत्रकार से जुड़े मामले के समय बार काउंसिलों को आवाज उठानी चाहिए थी.
अब शाहदरा थाने के मामले में अधिवक्ताओं को न्याय दिलाने के लिए बार काउंसिलों को आगे आना चाहिए. भारद्वाज ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि India की आजादी की लड़ाई में वकीलों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. ऐसे में अधिवक्ताओं को अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए और किसी भी व्यक्ति के साथ कथित अन्याय होने पर एकजुट होकर न्याय की मांग करनी चाहिए.
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पीकेटी/पीएम


