शहबाज शरीफ के नेतृत्व में पाकिस्तान बढ़ रहा ‘तानाशाही’ की ओर : रिपोर्ट

ढाका, 17 अक्टूबर . क्या Pakistan की वर्तमान Government इमरान खान फोबिया की कैद में है? क्या वजीर-ए-आजम शहबाज शरीफ देश को तानाशाही की ओर धकेल रहे हैं और क्या इमरान के खौफ में वो सही फैसले नहीं ले पा रहे हैं? इन तमाम सवालों का जवाब एक रिपोर्ट में दर्ज है. रिपोर्ट जो ‘बंधक Government’ के Pakistan-तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) से खौफ की तस्वीर पेश करती है.
बांग्लादेश के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र ‘प्रोथोम आलो’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर इमरान खान को इस्लामाबाद के अल-शिफा अस्पताल में स्थानांतरित करने के Supreme Court के 18 अगस्त के फैसले को लागू कर दिया गया होता, तो खैबर पख्तूनख्वा में Pakistan तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की प्रांतीय Government को निलंबित करके वहां ‘गवर्नर शासन’ लागू करने की नौबत नहीं आती, और न ही पार्टी को ‘लॉन्ग मार्च’ निकालने की जरूरत पड़ती.
रिपोर्ट में कहा गया है, “चाहे कोई इसे माने या न माने, सच तो यह है कि Pakistan की राजनीति एक ऐसे व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पिछले तीन सालों से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद है. इस कैदी का नाम इमरान खान है. 18 अगस्त को Pakistan के Supreme Court ने आदेश दिया था कि इमरान खान को दो दिनों के भीतर इस्लामाबाद के अल-शिफा अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए. लेकिन शहबाज शरीफ की Government ने इस आदेश को नजरअंदाज कर दिया; उन्होंने इमरान खान को बस Pakistan इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पिम्स) का एक चक्कर लगवाया और वापस लाकर अदियाला जेल में बंद कर दिया.”
इसमें आगे कहा गया, “खैबर पख्तूनख्वा (केपी) के Chief Minister सोहेल अफरीदी, इमरान खान की पार्टी ‘Pakistan तहरीक-ए-इंसाफ’ (पीटीआई) से जुड़े हैं. अफरीदी ने इमरान खान की रिहाई के लिए इस्लामाबाद की ओर एक ‘लॉन्ग मार्च’ निकालने की घोषणा की. इस मार्च को रोकने के लिए संघीय Government ने पीटीआई के साथ बातचीत शुरू की. लेकिन अफरीदी ने कहा कि अगर इमरान खान उनसे ‘लॉन्ग मार्च’ रोकने के लिए कहेंगे, तो वे इसे रोक देंगे. संघीय Government इस पर सहमत नहीं हुई. बातचीत विफल होने के लिए अफरीदी को जिम्मेदार ठहराते हुए, Government ने खैबर पख्तूनख्वा में ‘गवर्नर रूल’ लागू करने का फैसला किया.”
रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि Pakistan के प्रांतों में ‘गवर्नर रूल’ लागू करने का एक पुराना इतिहास रहा है, लेकिन इसके नतीजे अक्सर बहुत कष्टदायक रहे हैं. दुख की बात है कि देश एक बार फिर उसी तकलीफदेह दौर को दोहराता हुआ नजर आ रहा है.
जहां सोहेल अफरीदी का मार्च इमरान खान की रिहाई के लिए था, वहीं शहबाज शरीफ ने अपना एक अलग Political अभियान (मार्च) शुरू किया है, जो Pakistan को ‘तानाशाही’ (सिविलियन डिक्टेटरशिप) की ओर ले जा रहा है.
रिपोर्ट में कहा गया है, “शहबाज शरीफ Government का कहना है कि वे जो कुछ भी कर रहे हैं, वह संविधान के दायरे में रहकर कर रहे हैं. संविधान उन्हें Supreme Court के आदेशों को लागू करने का भी निर्देश देता है, लेकिन जहां संविधान उनके रास्ते में रुकावट बनता है, वे उसे नजरअंदाज कर देते हैं. वहीं, जहां संविधान उनके Political एजेंडे को पूरा करने में मददगार होता है, वहां वे संविधान के सबसे बड़े समर्थक बन जाते हैं. इमरान खान भी कुछ ऐसा ही किया करते थे.”
–आईएनएस
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