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Friday, 23 October 2026
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वियतनाम के युवा सैन्य अधिकारियों का एनडीए दौरा, बदलती युद्ध चुनौतियों पर मंथन

वियतनाम के युवा सैन्य अधिकारियों का एनडीए दौरा, बदलती युद्ध चुनौतियों पर मंथन

New Delhi, 23 अक्टूबर . वियतनाम के 10 युवा सैन्य अधिकारियों ने भारतीय राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) का दौरा किया है. इस दौरान अधिकारियों ने पुणे के खड़कवासला स्थित अकादमी की विशिष्ट प्रशिक्षण व्यवस्था को समझा. यहां India की तीनों सेनाओं के कैडेट एक साथ सैन्य प्रशिक्षण लेते हैं. इनमें महिला कैडेट भी शामिल हैं. वियतनाम के सैन्य अधिकारियों की यह यात्रा India और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

वियतनामी अधिकारियों को एनडीए की उस प्रशिक्षण परंपरा से परिचित कराया गया, जिसमें थल सेना, नौसेना और वायुसेना के भावी अधिकारियों को साझा वातावरण में तैयार किया जाता है. इस व्यवस्था का उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच आपसी तालमेल, सहयोग और संयुक्त रूप से काम करने की क्षमता विकसित करना है. इस दौरान वियतनामी सैन्य अधिकारियों ने अकादमी के प्रशिक्षकों और कर्मचारियों से भी संवाद भी किया.

इस संवाद से दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच अनुभवों और पेशेवर विचारों के आदान-प्रदान का अवसर मिला. साथ ही, India और वियतनाम के बीच रक्षा संबंधों को और मजबूत करने में भी मदद मिली. दूसरी ओर, लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला (सेवानिवृत्त) ने एमआईएलआईटी में डीएसटीएससी-09 सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों के अधिकारियों को संबोधित किया. उन्होंने ‘नई राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था के दौर में India की सुरक्षा चुनौतियां’ विषय पर अपने विचार रखे.

अपने संबोधन में उन्होंने दुनिया में जारी संघर्षों से मिले सबक के आधार पर युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा के बदलते स्वरूप को समझाया. उन्होंने तीन ऐसे बड़े बदलावों की ओर ध्यान दिलाया, जो आज की सुरक्षा व्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं. इनमें सैन्य शक्ति और हार्ड पावर की फिर से बढ़ती अहमियत पर जानकारी दी गई. साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा को आकार देने में तकनीक की निर्णायक भूमिका और उभरती तकनीकों के कारण सैन्य मामलों में आ रही क्रांतिकारी तब्दीली भी इसमें शामिल हैं.

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक आधुनिक युद्ध में केवल पारंपरिक सैन्य क्षमता ही पर्याप्त नहीं है. तकनीकी विकास ने युद्ध लड़ने के तरीकों और सैन्य अभियानों की प्रकृति को बदलना शुरू कर दिया है. ऐसे में सशस्त्र बलों को नई परिस्थितियों के अनुरूप अपनी रणनीति, तैयारी और युद्ध संबंधी क्षमताओं में बदलाव करना होगा.

लेफ्टिनेंट जनरल शुक्ला ने कम लागत वाले साधनों, बड़ी संख्या में सटीक हमले करने की क्षमता और एआई आधारित युद्ध की ओर बढ़ते रुझान के अनुरूप खुद को ढालने की जरूरत पर जोर दिया. उनका संबोधन इस बात को रेखांकित करता है कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सैन्य शक्ति के साथ तकनीकी दक्षता और बदलती युद्ध परिस्थितियों के अनुसार तेजी से अनुकूलन करना भी जरूरी होगा.

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जीसीबी/एसके

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