
New Delhi, 9 सितंबर . केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने Wednesday को कहा कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल Governmentी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि इसमें जनभागीदारी, सामाजिक संस्थाओं और निजी क्षेत्र की सक्रिय भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि Government की अधिकांश योजनाएं तभी सफल हो सकती हैं जब समाज, उद्योग और नागरिक मिलकर उनमें योगदान दें.
दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि ‘पीपुल फॉर एक्शन’ के तत्वावधान में आयोजित यह पहल कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) से जुड़े संगठनों, दानदाताओं और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाकर सार्थक संवाद का अवसर प्रदान करती है. उन्होंने कहा कि Government भी कई ऐसी योजनाएं चला रही है, जिनमें नागरिकों, सामाजिक संगठनों और निजी क्षेत्र के सहयोग की आवश्यकता है.
मंत्री ने कहा कि पीएम सेतु योजना इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण है. लगभग 60,000 करोड़ रुपए की इस योजना का उद्देश्य कौशल विकास संस्थानों और औद्योगिक क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है.
उन्होंने मीडिया को बताया कि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) देश में कौशल विकास का प्रमुख आधार हैं और उद्योग जगत की भागीदारी से इन संस्थानों के पाठ्यक्रमों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और रोजगार क्षमता को और मजबूत बनाया जा सकता है. योजना के तहत सीएसआर फंड के माध्यम से उद्योगों को कौशल विकास के क्षेत्र में योगदान देने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है.
Union Minister ने आगे कहा, “शिक्षा क्षेत्र में भी निजी क्षेत्र की भागीदारी बेहद जरूरी है. शिक्षा मंत्रालय ने ‘विद्यांजलि पोर्टल’ इसी उद्देश्य से विकसित किया है, ताकि कंपनियां, संस्थाएं और पूर्व छात्र अपने स्कूलों के विकास में योगदान दे सकें.”
उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन और स्कूल मिलकर विभिन्न परियोजनाएं तैयार करते हैं, जिनमें सीएसआर और सामाजिक योगदान के माध्यम से संसाधन जुटाए जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि समाज के अधिकांश लोगों का अपने विद्यालयों से भावनात्मक जुड़ाव होता है और वे शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने के इच्छुक रहते हैं.
जयंत चौधरी ने आगे कहा कि हाल ही में जारी सीएसआर रिपोर्ट से पता चलता है कि कॉर्पोरेट सामाजिक निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा अभी भी महानगरों और प्रमुख औद्योगिक केंद्रों तक सीमित है.
उन्होंने कहा कि अब आवश्यकता है कि सीएसआर गतिविधियों को आकांक्षी जिलों और आकांक्षी ब्लॉकों तक पहुंचाया जाए, जहां विकास की अधिक जरूरत है. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि उद्योग अक्सर अपनी फैक्ट्रियों और परिचालन क्षेत्रों के आसपास सीएसआर गतिविधियां संचालित करना पसंद करते हैं, क्योंकि वहां उन्हें अपने निवेश के परिणाम और प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं.
इसके बावजूद उन्होंने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे देश के पिछड़े और विकासशील क्षेत्रों में भी सीएसआर निवेश बढ़ाने की दिशा में आगे आएं.
मंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 की सीएसआर रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि खेल क्षेत्र को सीएसआर निवेश में अधिक प्राथमिकता मिल रही है. उन्होंने इसे सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि खेल, शिक्षा, कौशल विकास और सामुदायिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी देश के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है.
उन्होंने कहा कि Government ऐसे प्रयासों को लगातार प्रोत्साहित कर रही है ताकि सीएसआर केवल वित्तीय सहायता तक सीमित न रहकर सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन सके.
Union Minister ने सोशल स्टॉक एक्सचेंज को सामाजिक क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण और नवाचारी पहल बताया. उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के माध्यम से सामाजिक संस्थाएं और गैर-लाभकारी संगठन अपनी परियोजनाओं को सार्वजनिक मंच पर प्रस्तुत कर सकते हैं और छोटे निवेशकों तथा दानदाताओं से संसाधन जुटा सकते हैं.
मंत्री ने आगे कहा, “इससे सामाजिक परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और अधिक लोगों को विकास कार्यों में भागीदारी का अवसर मिलेगा.” उन्होंने कहा कि सीएसआर जगत को सोशल स्टॉक एक्सचेंज की कार्यप्रणाली और तकनीकी पहलुओं को समझने की आवश्यकता है ताकि उसका अधिकतम लाभ उठाया जा सके.
चौधरी ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान सीएसआर क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों की ओर से जो सुझाव सामने आएंगे, उनका Government गंभीरता से अध्ययन करेगी. Government, उद्योग और सामाजिक संगठनों के बीच सहयोग बढ़ने से विकास योजनाओं का प्रभाव और अधिक व्यापक होगा.
उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आवश्यक है कि सीएसआर को केवल दान या सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे राष्ट्र निर्माण और समावेशी विकास के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में अपनाया जाए.
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