मेरा लक्ष्य गोल्ड मेडल जीतना है, एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम बेहद मजबूत: मनीषा भनवाला

New Delhi, 9 सितंबर . मौजूदा एशियाई चैंपियन मनीषा भनवाला को उम्मीद है कि एशियन गेम्स में महिलाओं की 57 किलोग्राम कैटेगरी में कड़ी टक्कर होगी. भारतीय रेसलर को अपनी कैटेगरी में मौजूद टैलेंट पर भरोसा है, लेकिन वह यह भी जानती हैं कि नतीजा इस बात पर निर्भर करेगा कि उस दिन कौन दबाव को सबसे बेहतर तरीके से संभालता है.

एशियन गेम्स के लिए भारतीय दल के रवाना होने से पहले Wednesday को मनीषा ने कहा कि पूरे एशिया में प्रतियोगिता का स्तर ऐसा है कि लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है, भले ही वह 2025 में महाद्वीपीय खिताब जीतने के आत्मविश्वास के साथ इस इवेंट में उतर रही हों.

मनीषा ने ‘ ’ से ​​कहा, “एशिया बहुत मजबूत है. मैं अपनी वेट कैटेगरी के बारे में बता सकती हूं. हमारे पास चार मजबूत लड़कियां हैं. मैं बस इतना बता सकती हूं कि मुकाबले वाले दिन मेरा शरीर कैसा महसूस करता है.”

57 किलोग्राम कैटेगरी की यह रेसलर नेशनल कैंप में तैयारी कर रही हैं, जहां वर्कलोड पर बारीकी से नजर रखी जाती है और हर सेशन की शारीरिक जरूरतों के हिसाब से उसमें बदलाव किया जाता है.

उन्होंने आगे कहा, “हम अभी इंडियन कैंप में हैं, तैयारियां अच्छी हैं और उम्मीद है कि हमें मेडल मिलेंगे. हम सुबह 3 घंटे ट्रेनिंग करते हैं. फिर हम देखते हैं कि सुबह हमारे शरीर पर कितना भार पड़ा और उसी हिसाब से शाम को ट्रेनिंग करते हैं, या फिर पिछली शाम हमने कितने सेशन किए थे, उसके आधार पर ट्रेनिंग करते हैं.”

हालांकि, मनीषा एशियन गेम्स में सिर्फ हिस्सा लेने के लिए नहीं जा रही हैं. महाद्वीपीय स्तर पर सफलता का अनुभव होने के बाद उन्होंने अपने पहले एशियन गेम्स में और भी बड़ा लक्ष्य तय किया है. उन्होंने कहा, “मेरा लक्ष्य गोल्ड मेडल जीतना है. मैं हमेशा से गोल्ड मेडल जीतना चाहती थी. मैं 2025 में एशिया चैंपियन थी. मैं प्रार्थना करती हूं कि मुझे फिर से वैसा ही कुछ देखने को मिले.”

रेसलर ने खेलों में जाने वाली पूरी भारतीय टीम के अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद भी जताई और टीम की मजबूती का जिक्र करते हुए बताया, “भारतीय टीम बहुत मजबूत है. मुझे उम्मीद है कि सभी को मेडल मिलेगा.”

तैयारी में जापानी कोच अकाइशी (कोसेई) के साथ काम करना भी शामिल रहा है. मनीषा के अनुसार, उनकी ट्रेनिंग के कई पहलुओं में कोच का योगदान रहा है. मनीषा ने कहा, “हमारी फेडरेशन ने हमें बहुत अच्छे कोच दिए हैं. जैसे, हमारे पास जापानी कोच अकाइशी हैं. उनका तरीका बहुत बढ़िया है. उन्होंने हमारी बहुत मदद की है. उन्होंने रेसलिंग, फिटनेस और स्पीड ट्रेनिंग में हमारी बहुत मदद की है.”

मनीषा के लिए एशियन गेम्स का महत्व सिर्फ मेडल जीतने तक ही सीमित नहीं है. उनके प्रदर्शन ने उनके गांव की युवा लड़कियों को रेसलिंग अपनाने के लिए प्रेरित किया है, जिससे उन्हें जापान में सफलता पाने की एक और वजह मिली है.

उन्होंने कहा, “मेरा पूरा गांव मेरा समर्थन करता है. वहां के लोगों को मुझ पर बहुत गर्व है. मेरी वजह से कई लड़कियों ने रेसलिंग शुरू की है. अगर मैं मेडल जीतती हूं, तो पूरा गांव, जिला और पूरा देश मेरा स्वागत करेगा. मेरा परिवार मुझ पर सिर्फ गोल्ड मेडल या कोई भी मेडल जीतने का दबाव नहीं डालता. वे बस मुझसे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए कहते हैं.”

मनीषा ने कहा कि जो युवा रेसलर उनके सफर से प्रेरणा लेते हैं, उन्हें हमेशा मेहनत और समर्पण के साथ आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने सलाह दी कि हर दिन अपना सर्वश्रेष्ठ दें और पूरी कोशिश करें. मनीषा के मुताबिक, सफलता आसानी से नहीं मिलती. इसके लिए हर काम को गंभीरता से लेना और लगातार कड़ी मेहनत करना जरूरी है.

एसएम/एबीएम

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