
New Delhi, 14 सितंबर . Lok Sabha में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ‘मांसाहार’ वाली टिप्पणी पर इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती वजाहत कासमी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि India सनातन की भूमि है. सनातन सभ्यता और संस्कृति में मांसाहारी भोजन का कोई स्थान नहीं है.
इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती वजाहत कासमी ने से कहा, “India सनातन की भूमि है. सनातन सभ्यता और संस्कृति में मांसाहारी भोजन का कोई स्थान नहीं है. मुझे नहीं पता कि राहुल गांधी की सोच कैसी है या उन्हें क्या हो गया है. अगर वह मांसाहारी भोजन करना चाहते हैं, तो कोई समस्या नहीं है. उन्हें कोई रोक नहीं रहा है, लेकिन हर देश ऐसे मौकों का इस्तेमाल अपनी संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं को दिखाने के लिए करता है.”
उन्होंने कहा, “India सनातन की भूमि है और मांसाहारी भोजन सनातन संस्कृति का हिस्सा नहीं है. India ने दुनिया के सामने अपनी परंपराओं और संस्कृति का प्रदर्शन भी किया है. राहुल गांधी को यह समझना चाहिए कि ‘ब्रिक्स’ ने खुद दिखाया है कि India कितना शक्तिशाली है और Prime Minister मोदी कितने मजबूत नेता हैं.”
मुफ्ती वजाहत कासमी ने राहुल गांधी को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें ओच्छी बातें नहीं करनी चाहिए, क्योंकि ऐसे बयानों से उनका कद ही छोटा होता है.
इसके साथ ही, मुफ्ती वजाहत कासमी ने पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू किए जाने की घोषणा का स्वागत किया. उन्होंने कहा, “यूसीसी देश के विकास में बहुत अहम भूमिका निभाएगा. दुनिया भर के सभी विकसित और शिक्षित देशों में यूसीसी लागू है. ‘एक देश, एक कानून और एक संविधान’ होना चाहिए और पूरे देश में एक ही व्यवस्था लागू होनी चाहिए.
उन्होंने कहा, “देश में अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ नहीं होने चाहिए. उत्तराखंड के Chief Minister पुष्कर सिंह धामी ने इसे सबसे पहले उत्तराखंड में लागू किया था और कई अन्य जगहों पर भी इसकी तैयारी चल रही है. चूंकि एनडीए Government फैसले लेने में मजबूत और असरदार है, इसलिए हमें उम्मीद है कि उसके कार्यकाल में पूरे देश में यूसीसी लागू हो जाएगा. हम इसका स्वागत करते हैं.”
पश्चिम बंगाल में 252 मदरसों के बंद होने पर कासमी ने कहा, “मदरसा धार्मिक शिक्षा की जगह है. मदरसों को लेकर राजनीति ने बहुत दुविधाएं पैदा किया है, खासकर बंगाल में, जहां Political पार्टियां और Governmentें सत्ता में रही हैं. ममता बनर्जी ने मुसलमानों को इतनी आजादी दी कि उन्होंने गैर-कानूनी जगहों पर और गैर-कानूनी तरीकों से मस्जिदें व मदरसे बना लिए.”
इस्लामिक स्कॉलर ने कहा कि एनडीए Government की खासियत यह है कि वह कानून के मुताबिक काम करती है. इसलिए, अगर ऐसे मदरसे बंद किए जा रहे हैं या तोड़े जा रहे हैं, या ऐसी मस्जिदें और मदरसे सील किए जा रहे हैं और कानूनी कार्रवाई की जा रही है. यह अच्छी बात है. मुसलमानों को इसका स्वागत करना चाहिए. इस्लाम गैर-कानूनी मदरसों या गैर-कानूनी मस्जिदों को मंजूरी नहीं देता है.
भारत-अफगानिस्तान टी-20 मैच से पहले ‘वंदे मातरम’ गाए जाने पर इस्लामिक विद्वान मुफ्ती वजाहत कासमी ने कहा, “राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान के बराबर ही कानूनी सम्मान दिया गया है. यह देश के लिए खुशी की बात है. इसे क्रिकेट स्टेडियम में गाया गया और संसद समेत कई अन्य कार्यक्रमों में भी गाया जा रहा है. मुझे उम्मीद है कि देशभर के लोग उसी सम्मान के साथ ‘वंदे मातरम’ गाएंगे और अपनी देशभक्ति जाहिर करेंगे. मैं प्रार्थना करता हूं कि जो लोग इसका विरोध करते हैं, उन्हें भी ईश्वर-अल्लाह सद्बुद्धि दे.”
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डीसीएच/