राहुल गांधी आईडेंटिटी क्राइसिस के शिकार, तय करें नेता हैं या कॉमेडियन: तुहिन सिन्हा

नई दिल्‍ली, 20 सितंबर . भाजपा के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता तुहिन ए. सिन्हा ने राहुल गांधी द्वारा पीएम मोदी की नकल पर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की. उन्‍होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि वह आईडेंटिटी क्राइसिस से जूझ रहे हैं. उन्‍हें तय करना होगा कि वह एलओपी (Lok Sabha में नेता प्रतिपक्ष) हैं, राजनेता हैं या स्‍टैंडअप कॉमेडियन हैं.

तुहिन सिन्‍हा ने समाचार एजेंसी से बातचीत के दौरान कहा कि राहुल गांधी ने पिछले माह संदीप दीक्षित के साथ अभद्र तमाशा किया था. वही तमाशा इंदौर में छात्रों के गूंज कार्यक्रम के दौरान देखने को मिला.

उन्‍होंने कहा कि उसी कार्यक्रम में कॉमेडियन ने पीएम मोदी की माता जी के बारे में बड़ी ओछी बात कही. भाजपा नेता ने सवाल उठाया कि यह कहां की मानसिकता है. आप राजनीति से संबंध न रखने वाली एक मां का मजाक उड़ा रहे हैं. संदीप दीक्षित ने इटली की Prime Minister मेलोनी के संदर्भ में जो बयान दिया था,जनता ने उसको भी देखा और सुना है.

भाजपा नेता ने साल 2019 का एक अन्‍य उदाहरण देते हुए कहा कि महिला डिफेंस मिनिस्‍टर निर्मला सीतारमण राफेल मुद्दे पर संसद में बोल रही थीं. पूरे डिस्‍कशन के दौरान राहुल गांधी पेपर के विमान उड़ा रहे थे. राहुल गांधी में थोड़ी भी गंभीरता नहीं है. राहुल गांधी जैसा हिप्‍पोक्रेट देश ने नहीं देखा है.

भाजपा नेता तुहिन सिन्‍हा ने कांग्रेस सांसद जयराम रमेश के एसआईआर को लेकर किए गए पोस्ट पर कहा कि डूसू परिणाम के बाद कांग्रेस के लिए स्‍पष्‍ट संदेश है कि इस देश में नकारात्‍मकता और भ्रम फैलाने की राजनीति नहीं चलेगी. एसआईआर Supreme Court की तरफ से स्‍वीकृति मिली है. Supreme Court ने इस प्रक्रिया को जायज ठहराया गया है. मॉनिटरिंग के दौरान कई सवाल उठे, उसमें Supreme Court ने अपने इनपुट दिए. लेकिन कहीं पर इसको गैर संवैधानिक नहीं बताया गया. इस प्रकार को हर उस व्‍यक्ति को समर्थन करना चाहिए, जो नहीं चाहता है कि अवैध मतदाता वोटर लिस्‍ट में शामिल हों.

उन्‍होंने कहा कि जो मृत हैं, जिनका दूसरी जगह तबादला हो गया है, री-लोकेशन हुआ है, उनको क्‍यों वोटर लिस्‍ट में कांग्रेस पार्टी दिखाना चाहती है. उन्‍होंने सवाल उठाया कि क्‍या कांग्रेस को असल वोटर पर विश्‍वास नहीं रह गया है.

भाजपा नेता ने कहा कि मुझे लगता है कि कांग्रेस पार्टी को इस तरह के संवैधानिक प्रक्रियाओं का समर्थन करना चाहिए. अगर नकारात्‍मकता फैलाएगी तो वही हाल पूरे देश में होगा जो डूसू चुनाव में एनएसयूआई का देखने को मिला है.

एएसएच/वीसी

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