
New Delhi, 23 सितंबर . Prime Minister Narendra Modi ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर उन्हें नमन किया है. उन्होंने कहा कि नचेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान के भावों से भरी उनकी ओजस्वी कविताएं आज भी देशवासियों के हृदय में शौर्य, तेज और आत्मगौरव का संचार करती हैं.
Prime Minister मोदी ने Wednesday को social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर उन्हें मेरा शत-शत नमन. जनचेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान के भावों से भरी उनकी ओजस्वी कविताएं आज भी देशवासियों के हृदय में शौर्य, तेज और आत्मगौरव का संचार करती हैं. उनकी रचनाएं साहित्य को समृद्ध करने के साथ-साथ मातृभूमि के प्रति समर्पण को भी प्रेरित करती हैं. उनका विराट व्यक्तित्व और कालजयी कृतित्व युगों-युगों तक भारतवासियों का मार्गदर्शन करता रहेगा.”
Lok Sabha स्पीकर ओम बिरला ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर भावपूर्ण नमन. हिंदी साहित्य के आकाश में दिनकर जी का स्थान केवल एक महान कवि के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे साहित्यकार के रूप में है, जिनकी लेखनी ने राष्ट्र की चेतना, जनभावनाओं और सामाजिक सरोकारों को स्वर दिया.”
उन्होंने लिखा, “‘रश्मिरथी’, ‘कुरुक्षेत्र’, ‘उर्वशी’, ‘रेणुका’ और ‘संस्कृति के चार अध्याय’ जैसी उनकी कालजयी कृतियों ने हिंदी साहित्य को समृद्ध करने के साथ-साथ भारतीय समाज और राष्ट्रचिंतन को भी नई दृष्टि प्रदान की. उनकी रचनाएं आज भी पाठकों को साहस, आत्मसम्मान, कर्तव्यबोध और सामाजिक चेतना का संदेश देती हैं. दिनकर जी तीन बार राज्यसभा के सदस्य भी रहे और संसद के माध्यम से सार्वजनिक जीवन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. दिनकर जी की अमर साहित्यिक विरासत भारतीय साहित्य और राष्ट्रचिंतन को सदैव प्रेरित करती रहेगी.”
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी रामधारी सिंह दिनकर को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने पोस्ट में लिखा, “श्रेष्ठ कवि और लेखक पद्म भूषण रामधारी सिंह दिनकर जी की जयंती पर उन्हें विनम्र अभिवादन.”
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, “अपनी ओजस्वी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना को स्वर देने वाले महान साहित्यकार, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन करता हूं. आप जैसे अनूठे सृजनकर्ता की अमूल्य रचनाएं सर्वदा साहित्य जगत की समृद्धि का सशक्त आधार रहेंगी. हिन्दी के अनन्य सेवक को प्रणाम.”
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