‘ग्लोबल साउथ’ देशों और सहयोगियों की मंत्री-स्तरीय बैठक, एस जयशंकर ने की अध्यक्षता

न्यूयॉर्क, 23 सितंबर . न्यूयॉर्क में Tuesday को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर ‘ग्लोबल साउथ’ के समान विचारधारा वाले देशों और सहयोगियों की उच्च-स्तरीय मंत्री-स्तरीय बैठक हुई. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उच्च-स्तरीय मंत्रिस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. बैठक का विषय ‘एक उज्ज्वल भविष्य की ओर साथ-साथ आगे बढ़ना-सशक्त वैश्विक दक्षिण का मजबूत पक्ष’ था.

बैठक में वैश्विक दक्षिण के सामने मौजूद मौजूदा चुनौतियों पर चर्चा हुई. इनमें जारी संघर्षों का खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर असर, व्यापार एवं निवेश प्रवाह में अस्थिरता, संघर्ष वाले क्षेत्रों में समुद्री यात्रियों की सुरक्षा, चरम जलवायु घटनाएं और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने में हो रही देरी प्रमुख रूप से शामिल रहे.

मित्र देशों ने बहुपक्षीय संस्थाओं के कमजोर पड़ने पर साझा चिंता जताई. उन्होंने मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार की तत्काल जरूरत पर जोर दिया. उनका कहना था कि मौजूदा वैश्विक संकटों का असर वैश्विक दक्षिण के देशों पर असमान रूप से पड़ रहा है.

वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ. प्रतिभागियों ने बहुपक्षीय मंचों पर वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई. साथ ही दक्षिण-दक्षिण सहयोग को व्यापक बनाने और एक-दूसरे की क्षमताओं तथा संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने पर सहमति जताई.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई. कहा गया कि एआई से होने वाला तकनीकी बदलाव दुनिया में नई खाई पैदा करने वाला नहीं होना चाहिए. वैश्विक दक्षिण को इस परिवर्तन का हिस्सा बनना होगा और एआई का इस्तेमाल मानव-केंद्रित तरीके से किया जाना चाहिए.

हाई लेवल मीटिंग में अपनी सामूहिक स्थिति को मजबूत करने और एक संतुलित, सबकी भागीदारी वाले तथा न्यायपूर्ण वैश्विक शासन ढांचे के लिए प्रयास जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई गई.

इससे पहले विदेश मंत्री ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर उच्च स्तरीय बैठक में प्रमुखता से उठाए गए मुद्दों का सारंश दिया. उन्होंने बताया कि बैठक में आपूर्ति श्रृंखलाओं, वित्त और कनेक्टिविटी में ऐसे अवरोधों को स्वीकार न करने की जरूरत पर जोर दिया गया, जो विकासशील देशों के लिए नई मुश्किलें पैदा कर सकते हैं. उन्होंने ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को भी विकास की बुनियादी जरूरत बताया.

बैठक में समुद्री सुरक्षा का मुद्दा भी उठा. प्रतिभागियों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन के साथ समुद्री मार्गों और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा संघर्ष वाले क्षेत्रों में समुद्री यात्रियों की सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत बताई.

केआर/

Leave a Comment