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Friday, 30 October 2026
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रांची : लापता बच्ची के मामले में झारखंड हाईकोर्ट नाराज, क्लीन चिट देने पर उठाए सवाल

रांची : लापता बच्ची के मामले में Jharkhand हाईकोर्ट नाराज, क्लीन चिट देने पर उठाए सवाल

रांची, 30 अक्टूबर . Jharkhand हाईकोर्ट ने वर्ष 2018 में गुमला जिले से लापता हुई बच्ची का अब तक पता नहीं चलने और मामले की जांच में कथित लापरवाही पर Police तथा राज्य Government के रवैये को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है.

जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सवाल किया कि वर्ष 2018 से 2022 के बीच गुमला में पदस्थापित तत्कालीन Police अधीक्षकों और जांचकर्ताओं को किस आधार पर क्लीन चिट दे दी गई, जबकि जांच की निर्धारित अवधि की रिपोर्ट जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) को समय पर नहीं भेजी गई थी.

अदालत ने गृह विभाग को इस संबंध में नया शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है. सुनवाई के दौरान राज्य Government की ओर से दाखिल शपथ पत्र में स्वीकार किया गया कि लापता बच्ची के मामले में जांच की पीरियॉडिकल रिपोर्ट गुमला डीएलएसए को काफी विलंब से, 23 अक्टूबर 2026 को भेजी गई. Government की ओर से इस देरी के लिए अदालत से बिना शर्त माफी भी मांगी गई.

वहीं, प्रार्थी की ओर से पेश अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि Government ने पूर्व के अधिकारियों को बचाने की कोशिश की है और अदालत के सामने सही तथ्य नहीं रखे गए हैं. मामले में मुख्य आरोपी भूखली लकड़ा को 6 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था. Gujarat के गांधीनगर में उसका सस्पेक्ट डिटेक्शन टेस्ट कराया गया, जिसमें वह संदिग्ध पाई गई.

हालांकि, गिरफ्तारी के कई दिनों बाद Police कस्टडी के लिए आवेदन दिए जाने पर अदालत ने सवाल उठाए और जांच की प्रक्रिया में देरी पर नाराजगी जताई. खंडपीठ ने गुमला के Police अधीक्षक से भी जवाब मांगा है कि जांच में इतनी देरी और लापरवाही क्यों हुई तथा इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है.

गौरतलब है कि गुमला से वर्ष 2018 में लापता हुई बच्ची की मां चंद्रमुनि उराइन ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी. बच्ची के लापता होने के समय उसकी उम्र छह वर्ष थी. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत पहले भी Police की जांच पर असंतोष जता चुकी है और बच्ची का पता लगाने में विफल रहने पर जांच सीबीआई को सौंपने की चेतावनी दे चुकी है.

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एसएनसी/एसके

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