यूपीआई भारत के पेमेंट इकोसिस्टम का अहम हिस्सा है, आयरलैंड यूरोपीय संघ में इसकी संभावनाएं तलाशने को उत्सुक है: आईडीए आयरलैंड

Mumbai , 7 सितंबर . India की डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) की वैश्विक सफलता अब यूरोपीय देशों का भी ध्यान आकर्षित कर रही है. आयरलैंड की निवेश प्रोत्साहन एजेंसी आईडीए आयरलैंड के फिनटेक एवं पेमेंट्स प्रमुख सीन मैकविलियम्स ने Monday को कहा कि आयरलैंड यूपीआई की तेज प्रगति को समझना चाहता है और यह भी जानना चाहता है कि इस मॉडल का उपयोग आयरलैंड, यूरोपीय संघ (ईयू) और अन्य बाजारों में किस प्रकार किया जा सकता है.

Mumbai में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल के दौरान न्यूज एजेंसी से खास बातचीत में मैकविलियम्स ने कहा कि India की यात्रा का उनका मुख्य उद्देश्य देश के तेजी से विकसित हो रहे फिनटेक और डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को समझना है. साथ ही वे यह भी जानना चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय विस्तार की योजना बना रही भारतीय कंपनियों के लिए आयरलैंड किस प्रकार सहयोगी भूमिका निभा सकता है.

उन्होंने से बात करते हुए कहा कि यूपीआई आज India की भुगतान व्यवस्था का एक केंद्रीय स्तंभ बन चुका है और दुनिया भर के देश ऐसे समाधानों की तलाश कर रहे हैं जो भुगतान को अधिक सरल, तेज, सुलभ और सुविधाजनक बना सकें.

मैकविलियम्स ने कहा, “मैं विशेष रूप से यह समझने में रुचि रखता हूं कि India में यूपीआई की सफलता का आयरलैंड और यूरोपीय संघ के लिए क्या महत्व हो सकता है. साथ ही यह भी देखना चाहता हूं कि आयरलैंड में हो रहे फिनटेक नवाचारों और यूपीआई मॉडल के बीच किस प्रकार की संभावित समानताएं या सहयोग के अवसर मौजूद हैं.”

उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान क्षेत्र में India द्वारा हासिल की गई प्रगति दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण अध्ययन का विषय बन चुकी है. India ने बड़ी आबादी को डिजिटल वित्तीय सेवाओं से जोड़ते हुए भुगतान प्रणाली को व्यापक और समावेशी बनाया है, जिससे अन्य देशों को भी महत्वपूर्ण सीख मिल सकती है.

मैकविलियम्स ने बातचीत के दौरान आयरलैंड की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) रणनीति का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि आयरलैंड ने हाल ही में राष्ट्रीय एआई रणनीति शुरू की है, जिसका उद्देश्य देश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एआई नवाचार का प्रमुख केंद्र बनाना है.

उन्होंने कहा कि इस रणनीति का फोकस उभरती प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने, कौशल विकास, प्रतिभा निर्माण और जिम्मेदार व नियामक ढांचे के भीतर नवाचार को प्रोत्साहित करने पर है.

उन्होंने आगे कहा कि वित्तीय सेवाओं में नवाचार की आयरलैंड की मजबूत परंपरा रही है और अब एआई अगली बड़ी तकनीकी क्रांति के रूप में उभर रही है. इससे बहुराष्ट्रीय फिनटेक कंपनियों के साथ-साथ स्टार्टअप्स को भी वैश्विक विस्तार में सहायता मिल सकती है.

मैकविलियम्स ने बताया कि इस वर्ष यूरोपीय संघ की अध्यक्षता के तहत आयरलैंड 14 अक्टूबर को एक अंतरराष्ट्रीय एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिसमें वैश्विक कंपनियां, नीति-निर्माता और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ भाग लेंगे.

सम्मेलन में एआई से जुड़ी चुनौतियों, अवसरों और प्रमुख रुझानों पर चर्चा होगी तथा आयरलैंड को एआई नवाचार केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा.

उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक विस्तार की योजना बना रही भारतीय कंपनियों के लिए आयरलैंड कई महत्वपूर्ण लाभ प्रदान कर सकता है.

मैकविलियम्स ने कहा, “मुझे लगता है कि यूरोपीय बाजार तक पहुंच, मजबूत तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र, नवाचार-समर्थक नीतियां और वैश्विक वित्तीय सेवाओं की मौजूदगी भारतीय कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र हो सकती हैं.”

डीबीपी

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