Skip to content
Wednesday, 21 October 2026
Hindi Daily Kiran India, Rajasthan, business, sports, tech और अन्य श्रेणियों की ताज़ा हिन्दी ख़बरें।
BREAKING
बॉलीवुड,सिनेमा,मनोरंजन

यादों में असरानी : जिन्होंने अपनी कॉमेडी से हर दौर के दर्शकों के दिलों में बनाई खास जगह

यादों में असरानी : जिन्होंने अपनी कॉमेडी से हर दौर के दर्शकों के दिलों में बनाई खास जगह

New Delhi, 19 अक्टूबर . हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार हुए हैं, जिन्होंने अपनी अदाकारी से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई. इनमें एक नाम गोवर्धन कुमार असरानी का भी है, जिन्हें दुनिया असरानी के नाम से जानती है. उन्होंने अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग, चेहरे के अनोखे हाव-भाव और मजेदार डायलॉग बोलने के अंदाज से लोगों को खूब हंसाया.

उन्होंने अपने करियर में कई तरह के किरदार निभाए, लेकिन फिल्म ‘शोले’ के अंग्रेजों के जमाने के जेलर के रूप में उनकी पहचान कुछ ऐसी बनी कि आज भी उनका नाम आते ही यह किरदार याद आ जाता है. 20 अक्टूबर 2025 को 84 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले असरानी आज भी दर्शकों की यादों में जिंदा हैं.

असरानी का जन्म 1 जनवरी 1941 को Rajasthan के jaipur में एक सिंधी-हिंदू परिवार में हुआ था. उनके पिता का कालीन और साड़ियों का कारोबार था. परिवार चाहता था कि वह पढ़ाई पूरी करके कारोबार में हाथ बटाएं, लेकिन असरानी की दिलचस्पी अभिनय और संगीत में थी. आठ भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर आने वाले असरानी स्कूल के दिनों से ही नाटकों में हिस्सा लेते थे. उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो, jaipur के कार्यक्रमों में भी भाग लिया और धीरे-धीरे अभिनय के प्रति उनका लगाव बढ़ता गया.

मैट्रिक की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने Actor बनने का सपना देखना शुरू कर दिया था. इसी सपने को पूरा करने के लिए वह Mumbai भी पहुंचे, लेकिन शुरुआती दिनों में उन्हें सही दिशा नहीं मिल पाई और वह वापस jaipur लौट आए. हालांकि, उन्होंने अपने सपने को छोड़ा नहीं. कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) में दाखिला लिया और अभिनय की बारीकियां सीखीं.

असरानी के लिए फिल्मी दुनिया में जगह बनाना आसान नहीं था. अभिनय की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह हर Friday पुणे से Mumbai जाते, फिल्म निर्माताओं से मिलते और काम मिलने की उम्मीद लेकर लौट आते.

शुरुआत में उन्हें छोटे-छोटे किरदार मिले, लेकिन उन्होंने हर भूमिका को पूरी मेहनत और ईमानदारी से निभाया. धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा लोगों की नजरों में आने लगी. ‘गुड्डी’, ‘बावर्ची’, ‘नमक हराम’, ‘अभिमान’ और ‘चुपके चुपके’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय से अलग पहचान बनाई. इन फिल्मों में उन्होंने साबित किया कि किसी किरदार को यादगार बनाने के लिए उसका बड़ा होना जरूरी नहीं, बल्कि उसे निभाने का अंदाज मायने रखता है.

फिल्म ‘आज की ताजा खबर’ में उनके शानदार अभिनय के लिए उन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ हास्य Actor का पुरस्कार भी मिला. इसके अलावा, ‘रफूचक्कर’, ‘बालिका वधू’ और ‘पति पत्नी और वो’ जैसी फिल्मों में भी उनकी कॉमेडी दर्शकों को खूब पसंद आई.

असरानी के करियर का सबसे यादगार किरदार 1975 में आई फिल्म ‘शोले’ का जेलर था. फिल्म में उनका डायलॉग, ‘हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं’, आज भी लोगों की जुबान पर है. इस किरदार में वह खुद को बेहद चालाक और ताकतवर समझने वाले जेलर के रूप में नजर आए, लेकिन उनकी हरकतें दर्शकों को हंसने पर मजबूर कर देती थीं.

फिल्म में उनका किरदार भले ही छोटा था, लेकिन उन्होंने अपनी अदाकारी से ऐसी छाप छोड़ी कि वह हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित कॉमिक किरदारों में शामिल हो गया.

–

पीआईएम/एबीएम

Share