‘मेरा हाथ थामकर राजनीति की बारीकियां सिखाईं’, पीएम मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी को दी जन्मदिन की शुभकामनाएं

New Delhi, 8 नवंबर . भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी Sunday को 99 वर्ष के हो गए हैं. जन्मदिन के अवसर पर Prime Minister Narendra Modi ने उनको शुभकामनाएं दी हैं. Prime Minister ने आर्टिकल के माध्यम से उनके योगदान को हाईलाइट किया है.
पीएम मोदी ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “आज, 8 नवंबर, एक अहम दिन है. एल.के. आडवाणी 100वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं. इस खास मौके पर, उन्हें मेरी शुभकामनाएं. मैंने एक आर्टिकल लिखा है, जिसमें मैंने India के लिए उनके हमेशा याद रहने वाले योगदान को हाइलाइट किया है.”
पीएम ने आगे लिखा, “मैंने उनके सफर को याद किया है, चाहे वह बंटवारे के डर का सामना करना हो और नए सिरे से जिंदगी बनाना हो, जनसंघ को मजबूत करना और भाजपा बनाना हो, इमरजेंसी के दौरान डेमोक्रेसी के लिए खड़े होना हो, सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा को लीड करना हो या Government में देश की सेवा करना हो. आडवाणी जी के दूसरे पहलुओं के बारे में भी लिखा है- बहुत अधिक पढ़ने वाले व्यक्ति, कल्चर और सिनेमा के लिए उनका प्यार, बहुत अधिक लिखने वाले व्यक्ति और भी बहुत कुछ.”
Prime Minister मोदी ने आर्टिकल में लिखा, “आज 8 नवंबर को लालकृष्ण आडवाणी अपने जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं. यह कितना सुखद संयोग है कि आज ही दीपावली का पावन पर्व भी है. प्रभु श्रीराम और दीपों के इस उत्सव के साथ उनके जीवन का इतना महत्वपूर्ण पड़ाव जुड़ना, इस अवसर को और भी यादगार बनाता है. इस संयोग को एक और बात विशेष बनाती है. इसी वर्ष हम जनसंघ की स्थापना के 75 वर्ष, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती भी मना रहे हैं.”
पीएम ने आर्टिकल में लिखा, “आज का यह अवसर मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से बहुत भावुक कर देने वाला है. मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे हमेशा उनका स्नेह, सान्निध्य और मार्गदर्शन मिलता रहा है. आज उनके साथ बिताए हुए अनगिनत पल, उनसे जुड़ी कितनी ही स्मृतियां मन में उमड़ रही हैं.”
Prime Minister ने आर्टिकल में आगे लिखा, “सार्वजनिक जीवन में काम करते हुए कई दशक पहले मुझे उनके संपर्क में आने का अवसर मिला था. धीरे-धीरे हमारा यह संबंध इतना आत्मीय हो गया कि वे मेरे लिए अभिभावक की तरह बन गए. उन्होंने मेरा हाथ थामकर मुझे राजनीति की बारीकियां सिखाईं, कदम-कदम पर मेरा मार्गदर्शन किया. जीवन में जब भी कोई कठिन परिस्थिति आई, उनका अनुभव और उनकी सीख मेरे लिए संबल बने. उनकी वैचारिक स्पष्टता, उनका आत्मविश्वास और अपने सिद्धांतों के प्रति उनकी अटूट निष्ठा ने मुझे हमेशा प्रेरित किया. आज भी जब मैं उनसे मिलने जाता हूं, तो उनके साथ बिताया हुआ समय मुझे नई ऊर्जा और नई प्रेरणा से भर देता है. आज इस अवसर पर उनके लिए मन में एक ही भाव उमड़ रहा है… ‘जीवेत शरदः शतं, पश्येम शरदः शतं, शृणुयाम शरदः शतं’.”
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एसडी/एएस


