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Saturday, 17 October 2026
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मेट्टूर बांध से पानी छोड़ने की अवधि खत्म, कावेरी डेल्टा के किसानों की बढ़ी चिंता

मेट्टूर बांध से पानी छोड़ने की अवधि खत्म, कावेरी डेल्टा के किसानों की बढ़ी चिंता

चेन्नई, 15 अक्टूबर . तमिलनाडु Government द्वारा निर्धारित 45 दिनों की आपूर्ति अवधि समाप्त होने के साथ ही कावेरी डेल्टा में सिंचाई के लिए मेट्टूर बांध से पानी छोड़ना Thursday को बंद होने वाला है. भंडारण में गिरावट और पानी के कम प्रवाह से किसानों में चिंता बढ़ गई है, जिन्हें अभी भी अपनी फसलों के लिए पानी की आवश्यकता है.

Chief Minister विजय ने अपर्याप्त मानसून के कारण इस वर्ष जलापूर्ति सुनिश्चित न हो पाने की अनिश्चितता के बीच 1 सितंबर को डेल्टा सिंचाई के लिए बांध खोल दिया. सामान्यतः मेट्टूर बांध से 12 जून को डेल्टा क्षेत्र में कृषि कार्यों के लिए पानी छोड़ा जाता है. बांध खुलने में देरी के साथ यह घोषणा भी की गई कि सिंचाई के लिए जल आपूर्ति 45 दिनों तक जारी रहेगी.

Thursday को वह अवधि समाप्त होने के साथ जलापूर्ति को टालने की उम्मीद है, जब तक कि Government इसे बढ़ाने का फैसला नहीं करती. पानी की आपूर्ति अवधि के दौरान बांध का जलस्तर लगभग 32 फीट गिर गया है. 1 सितंबर को 91 फीट से गिरकर Wednesday शाम तक 59.13 फीट हो गया, जो पर्याप्त पुनर्भरण के बिना निरंतर सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने के कारण बांध पर पड़े दबाव को दर्शाता है.

जल प्रवाह मात्र 696 घन फीट प्रति सेकंड था, जो नीचे की ओर छोड़े जा रहे जल की मात्रा से काफी कम था. सिंचाई अवधि के दौरान अधिकतम 15,000 क्यूसेक तक पहुंच चुके जल प्रवाह को Wednesday शाम को भंडारण में लगातार गिरावट के कारण 12,000 क्यूसेक से घटाकर 10,000 क्यूसेक कर दिया गया.

जल प्रवाह में असंतुलन के कारण जलाशय का स्तर लगातार घट रहा है, जिससे मौजूदा स्तर पर जल आपूर्ति बनाए रखने की संभावना सीमित हो गई है.

जलस्तर में गिरावट से आने वाले दिनों में सिंचाई के पानी की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता भी बढ़ गई है.

कावेरी डेल्टा के किसानों ने राज्य Government से पानी छोड़ने का अनुरोध किया है, उनका कहना है कि उनके खेतों को अभी भी पानी की आवश्यकता है. उनके इस अनुरोध ने Government को तत्काल कृषि आवश्यकताओं और जलाशय में घटते जल भंडार के बीच संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी कर दी है.

अब सबका ध्यान उत्तर-पूर्वी मानसून पर केंद्रित हो गया है. बांध से पानी का निरंतर बहाव सुनिश्चित करने के लिए मानसून का मजबूत होना और जल प्रवाह में पर्याप्त सुधार होना आवश्यक होगा.

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एसएके/एबीएम

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